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यूपी PF घोटाला: योगी सरकार के सख्त रवैये पर भी न रुके अफसरों के काले कारनामे !

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग का भविष्य निधि घोटाला ने सियासत में खलबली मचा दी है। वहीं इस घोटाले में नौकरशाही के भ्रष्टाचार पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जहां पिछली सरकार में बिजली विभाग के नियम के विरुद्ध जाकर DHFL में निवेश करने का तरीका अधिकारियों ने बनाया वहीं सरकार बदलने के बाद भी अधिकारी उसे रोकने के बजाए और अधिक निवेश करते रहे। बीजेपी सरकार के तीखे तेवरों को नजरअंदाज करते हुए अधिकारियों ने 4101.70 करोड़ रुपये फंसा दिए, जबकि पिछली सरकार में यह आंकड़ा 21 करोड़ रुपये तक ही पहुंचा था।

उत्तर प्रदेश की सियासत में भले ही एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर बचने का प्रयास कर रहे हों, लेकिन सच तो ये है कि इस घोटाले को विभाग के अफसर दोनों सरकारों की आंख में धूल झोंकने में कामयाब रहे। हां, फर्क सिर्फ यही है कि पहले कम तो बाद में ज्यादा रकम का घोटाला करने में वह कामयाब हो गए।

आपको बता दें, उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट में बिजलीकर्मियों के जीपीएफ के जमा 2631.20 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन कंट्रीब्यूटरी प्रॉविडेंट फंड ट्रस्ट में सीपीएफ के जमा 1491.50 करोड़ रुपये DHFL में लगाए हैं। इसमें से कुल 1854.80 करोड़ रुपये तो वापस हुए, जीपीएफ के 1445.70 करोड़ व सीपीएफ के 822.20 करोड़ रुपये DHFL में फंस गए हैं। DHFL को सपा सरकार के दौरान पहले-पहल पीएफ के 21 करोड़ रुपये 17 मार्च 2017 को तब दिए गए, जब भाजपा की सरकार बनना तय हो चुका था।

घोटालेबाजों की संपत्ति होगी कुर्क

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि पावर कारपोरेशन के भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुहिम में अब तक तीन दागी अफसर जेल जा चुके हैं। किसी भी भ्रष्टाचारी को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि ऊर्जा विभाग के कार्मिक मेरे परिवार का हिस्सा हैं। उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। घोटालेबाजों की संपत्ति कुर्क होगी।

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