अपनी ‘जबरिया’ सेवानिवृति को चुनौती देंगे अमिताभ ठाकुर, कहा – पूर्वाग्रह में पारित किया गया आदेश

लखनऊ। आईपीएस अमिताभ ठाकुर अपने अनिवार्य सेवानिवृति को चुनौती देंगे। इस संबंध में उन्होंने गृह मंत्रालय, भारत सरकार, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन तथा डीजीपी कार्यालय से समस्त सम्बंधित अभिलेख मांगे हैं। अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में लिखा है कि वे भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश शासन के आदेश से पूर्णतया असहमत हैं। यह आदेश मात्र पूर्वाग्रह में पारित किया गया है।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि पूर्वाग्रह में पारित इस आदेश से उनके दोनों अध्ययनरत बच्चों सहित उनका पूरा परिवार प्रभावित हुआ है। वे इस निर्णय को चुनौती देना चाहते हैं। इससे पहले वे उन तथ्यों एवं कारणों को जानना चाहते हैं जिनके आधार पर यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि ये राष्ट्र की संप्रभुता से जुड़े अभिलेख नहीं हैं और एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सरकार से अपेक्षित है कि वे इन अभिलेखों को उपलब्ध कराये।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि संभव है कि उन अभिलेखों को देखने के बाद उन्हें लगे कि सरकार के पास ऐसा निर्णय करने के पर्याप्त आधार थे और वे इस सम्बन्ध में कोई कानूनी कार्यवाही नहीं करें, जिससे अनावश्यक कानूनी मुकदमों से बचत हो जाएगी। अमिताभ ने पत्र की प्राप्ति के सात दिवस में सभी सम्बंधित अभिलेख देने का अनुरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को सेवाओं के लिए अनपयुक्त करार देते हुए उन्हें समय से पहले सेवानिवृत्ति दे दी गई है। जबकि उनका सेवा कार्यकाल पूरा होने में अभी समय बाकी है। इसके बाद अभिताभ ठाकुर ने अपने घर के बाहर ‘जबरिया रिटायर’ का बोर्ड लगाया लिया। बताते चलें कि इससे पहले उन्हें 2015 में निलंबित कर दिया गया था। ठाकुर ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव पर धमकाने का आरोप लगाया था।

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