रक्षाबंधन पर कोरोना का असर, देश विदेशों में आने- जाने वाली राखियों पर रोक

राखी कारोबारियों ने बताया कि अलवर में 20 हजार से भी अधिक विभिन्न प्रकार की राखियां तैयार की जाती है। जो 24 रुपए दर्जन से 100 रुपए दर्जन तक होती है। जिसे बनाने में डोरी, मोती सहित स्टोन आदि का प्रयोग किया जाता है। राखी कारोबारियों ने बताया कि राखी बनाने में लगने वाला सामान देश के विभिन्न हिस्सों से आता है।

अलवर. रक्षाबंधन पर्व पर भाई के हाथों पर सजने वाली राखियों का कारोबार इस बार कोरोना वायरस के चलते सिमट कर रहा गया है। अलवर का देश सहित विदेशो में नाम करने वाली रखियों का कारोबार इस बार 100 किलोमीटर के दायरे में सिमट गया है। जिससे राखी कारोबारियों को करोड़ों का घाटा हो रहा है।प्रमुख व्यवसायी बच्चू सिंह जैन ने बताया कि अलवर की राखियों की मांग भारत सहित 24 देशों में है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते राखी देश नहीं विदेशों में भी नहीं जा पा रही। अलवर के 100 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले दुकानदार माल जरूर खरीद रहे हैं, वो भी पहले की अपेक्षा कम माल ले रहे हैं। जिससे राखी का कारोबार इस बार 15 से 20 प्रतिशत ही रह गया है। राखी कारोबारियों के गोदामों में माल बनकर कर तैयार रखा है, लेकिन इस साल कोरोना के डर से कोई माल लेने नहीं आ रहा है। ऐसे में करोडों रुपए की राखी बनकर गोदामों में ही रखी है। जिसका सीधा असर राखी बनाने वाले लोगों की आजीविका पर भी पड़ रहा है।

दरसअल राखी के कारोबार से हजारों की संख्या में परिवार जुड़े हुए हैं, जो साल भर अपने घरों में राखियां बनाने का काम करते हैं। इस साल डिमांड नहीं होने के कारण वो भी बेरोजगार हो गए है।

राखी कारोबारियों ने बताया कि अलवर में 20 हजार से भी अधिक विभिन्न प्रकार की राखियां तैयार की जाती है। जो 24 रुपए दर्जन से 100 रुपए दर्जन तक होती है। जिसे बनाने में डोरी, मोती सहित स्टोन आदि का प्रयोग किया जाता है। राखी कारोबारियों ने बताया कि राखी बनाने में लगने वाला सामान देश के विभिन्न हिस्सों से आता है। 3 साल पहले चाइना का सामान काम में लिया जाता था जिसे बाद में बंद कर दिया गया। अब पूर्ण रूप से स्वदेशी कच्चे माल से राखियां तैयार की जाती है।

अलवर जिले में राखी के करीब एक दर्जन से अधिक व्यवसायी है। जिनके पास करोडों का माल तैयार होता है। अलवर में बनने के बाद यह राखी देश विदेशों में पहुंचती है। लेकिन मार्च, अप्रैल और मई माह में रेलवे व बस बन्द होने के कारण व्यापारी माल के लिए नही आ पा रहे।अब केवल स्थानीय व्यापारी ही राखियो की खरीददारी कर रहे है। लॉकडाउन खुलने के बाद अभी भी पूरी तरह से आवागमन शुरू नहीं हो पाया। जिसका सीधा असर राखी व्यवसाय पर पड़ रहा।

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