UP: कोरोना की वजह से वर्षों की पुरानी परम्परा टूटी, नहीं निकला मां का मनावन डोला

अहरौरा स्थित राजा कर्ण पाल के पर्वत शिखर पर भंडारी देवी मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां की विशेष पूजा अर्चना के उपरांत विदाई कराकर डोला उठाने की प्राचीन परम्परा रही है। डोला संग सैकड़ों अनुयायी भक्तिमय गीतों के साथ विदाई में शरीक होते हैं। इस मनावन डोला यात्रा की विशेष मान्यता है। रास्ते भर महिलाएं अक्षत और पुष्प की वर्षा कर सोहर और भक्तिमय गीतों संग मां को विदा करती हैं।

मीरजापुर. अहरौरा पहाड़ पर स्थित मां भंडारी देवी का मनावन डोला प्रशासनिक रोक के चलते नहीं उठ सका। जिसके चलते मंदिर के श्रृंगारिया, मां भंडारी के अनुयायी तथा श्रद्धालु भक्तों की आस्था आहत हुई है। मां का मनावन डोला न निकलने से डोली लेकर विदाई कराकर पर्वत शिखर पर लाने की वर्षों पुरानी परम्परा टूट गई। सीमित लोगों के संग डोला उठाने के लिए भी प्रशासनिक रोक को लेकर मंदिर परिवार ने नाराजगी जताई।
अहरौरा स्थित राजा कर्ण पाल के पर्वत शिखर पर भंडारी देवी मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां की विशेष पूजा अर्चना के उपरांत विदाई कराकर डोला उठाने की प्राचीन परम्परा रही है। डोला संग सैकड़ों अनुयायी भक्तिमय गीतों के साथ विदाई में शरीक होते हैं। इस मनावन डोला यात्रा की विशेष मान्यता है। रास्ते भर महिलाएं अक्षत और पुष्प की वर्षा कर सोहर और भक्तिमय गीतों संग मां को विदा करती हैं। कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष यात्रा को रोक दिया गया।
इस सम्बंध में थानाध्यक्ष अहरौरा राजेश चौबे ने बताया कि कोरोना संक्रमण में डोला यात्रा उचित नहीं है। इसलिए आपसी सहमति बनाकर डोला ले जाने तथा मनावन यात्रा निकालने पर रोक लगाई गई। परंतु पारंपरिक पूजा करने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। मंगलवार को निर्धारित तिथि के दिन पुलिस ने मौजूद  श्रद्धालुओं से सामाजिक दूरी बनाए रखने का प्रयास किया है।
 प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मां भंडारी की मनावन यात्रा तो रोक दी गई। परंपरागत पूजा के लिए भंडारी देवी पर्वत शिखर पर गए पुजारियों को पूजा तक करने नहीं दिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस की तानाशाही और बर्बरता का शिकार पुजारियों को होना पड़ा। पूजा के दौरान पहुंची पुलिस ने पुजारियों की जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं उनको अपराधियों की भांति लाकर हवालात में बंद कर दिया गया। उत्पीड़न के बावजूद पुजारियों ने पर्वत शिखर पर मां भंडारी की परंपरागत पूजा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सम्पन्न कराई तब जाकर आत्मीय अनुभूति का संतोष मिला।

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