UP: सोमवती अमावस्या पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में आस्था की अखंड जलधार

इस बार सावन माह का तीसरा सोमवार दुर्लभ संयोग में है। लगभग 20 साल बाद तीसरे सोमवार को हरियाली और सोमवती अमावस्या का संयोग है। इसमें पुनर्वसु नक्षत्र, हर्षण योग, चतुष्पद करण, सर्वार्थसिद्धि योग का एक साथ होना सुखद संयोग है।

वाराणसी. सावन के तीसरे सोमवार, हरियाली और सोमवती अमावस्या के साथ सर्वसिद्धि योग, अमृत योग, सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में शिवभक्तों ने काशी पुराधिपति के दरबार में हाजिरी लगाई। दरबार में मत्था टेक श्रद्धालुओं ने घर परिवार में सुख शान्ति के साथ कोरोना संकट से मुक्ति देने की कातर गुहार भी लगाई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के नारों से गुजांयमान रहा।
कोरोना संकट काल में सुबह पांच बजे से बाबा के अर्धनारीश्वर स्वरूप की झांकी का दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु शा​रीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए बैरिकेडिंग में कतार बद्ध ​होने लगे। रात 3.30 पर बाबा का भव्य श्रृंगार,भोग मंगला आरती के बाद मंदिर का पट भक्तों के लिए खुल गया। रेड कार्पेट पर चलकर भक्त मंदिर के प्रवेश द्यारों पर पहुंचे। कोरोना के चलते मंदिर के तीनों प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्कैनर से होकर शिव भक्तों को गुजरना पड़ रहा है। मंदिर में प्रवेश से पहले उन्हें सैनिटाइज कर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कराते हुए मंदिर में एक बार में केवल 5 ही लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है।
सावन के तीसरे सोमवार में दुर्लभ संयोग-
इस बार सावन माह का तीसरा सोमवार दुर्लभ संयोग में है। लगभग 20 साल बाद तीसरे सोमवार को हरियाली और सोमवती अमावस्या का संयोग है। इसमें पुनर्वसु नक्षत्र, हर्षण योग, चतुष्पद करण, सर्वार्थसिद्धि योग का एक साथ होना सुखद संयोग है। आज के दिन कई नक्षत्रों का शुभ संयोग में काशी पुराधिपति की पूजा आराधना से सारे संकट से श्रद्धालु मुक्त हो जाएंगे। पांच ग्रह चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र व शनि अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। इन पांच ग्रहों के अपनी-अपनी राशियों में रहने से पूजा का महत्व अधिक है। बाबा के अर्धनारीश्वर रूप की आराधना से विवाहितों का दाम्पत्य जीवन अच्छा चलता है तो अविवाहितों को योग्य वर मिलने के भी योग बनते हैं।

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