मध्य प्रदेश: राज्यपाल लालजी टंडन के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक घोषित

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन के निधन पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज 11 बजे पूरे मंत्रिमंडल के साथ कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के राज्यपाल स्वर्गीय लालजी टंडन जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का मंगलवार तडक़े सुबह 5:30 बजे निधन हो गया। लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 85 वर्षीय थे और पिछले कई दिनों से उनका स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था। लालजी टंडन के निधन की जानकारी उनके बेटे आशुतोष टंडन ने ट्वीट कर दी। वे आपातकाल में 18 माह मीसा में बन्द रहे, लोकतंत्र सेनानी थे। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्यपाल लालजी टंडन के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन के निधन पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज 11 बजे पूरे मंत्रिमंडल के साथ कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के राज्यपाल स्वर्गीय लालजी टंडन जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री आज लखनऊ में स्व लाल जी टंडन को श्रद्धांजलि अर्पित करने जाएंगे। सीएम शिवराज ने लालजी टंडन को श्रद्धांजलि देते हुए अपने संदेश में कहा ‘मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्रद्धेय श्री लालजी टंडन के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ।
टंडन जी का मार्गदर्शन हम सभी @BJPyIndia कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक मिला। उन्होंने जनता और राष्ट्र की सेवा का एक अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए अपनी नीतियों से @BJPyUP को भी सशक्त किया। मध्यप्रदेश के राज्यपाल रहते हुए टंडनजी ने हमें सदैव सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।राष्ट्र के प्रति उनके प्रेम और प्रगति हेतु योगदान को चिरकाल तक याद रखा जाएगा। आत्मा अजर-अमर है। वे आज हमारे बीच नहीं हैं परंतु अपने सुविचारों द्वारा वे हमारी स्मृतियों में सदैव जीवित रहेंगे।
 
एक अन्य ट्वीट कर CM शिवराज ने कहा ‘मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल परिजनों को इस वज्रपात को सहने की शक्ति प्रदान करें। श्रद्धेय टंडन जी कुशल संगठक, राष्ट्रवादी विचारक और सफल प्रशासक थे। स्व. अटल जी के निकट सहयोगी रहते हुए उन्होंने लखनऊ और उत्तरप्रदेश के विकास में अतुलनीय योगदान दिया। उनके द्वारा किये गए विकासकार्यों को वर्षों तक याद किया जाएगा। श्रद्धेय टंडन जी का जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है। उनसे मुझे सदैव पितृतुल्य स्नेह मिला। जब भी कभी मुश्किल आती थी, मैं उनका मार्गदर्शन लेता था। उनकी कमी को अब पूरा नहीं किया जा सकता।

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