कोरोना का कहर: 190 साल पुरानी परम्परा का खंडन, नहीं निकलेगी तीज माता की सवारी

सवारी से पहले तीज माता को पुलिस द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। वही सवारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी सागर पर पहुंचते हैं। जहां दिनभर मेला भी भरता है, लेकिन इस बार कोरोना नियमों के चलते तीज माता की सवारी नहीं निकाली जाएगी।

कोरोना महामारी के चलते 190 सालों में पहली बार ऐसा होगा कि जब अलवर में 23 जुलाई को तीज माता की सवारी नहीं निकाली जाएगी. तीज के त्यौहार पर अलवर शहर में पूर्व राजपरिवार की ओर से हर साल महल चौक स्थित जनानी ड्योढ़ी से बैंड बाजे और शाही लवाजमे के साथ पालकी में सागर तक तीज माता की सवारी निकाली जाती है।

सवारी से पहले तीज माता को पुलिस द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। वही सवारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी सागर पर पहुंचते हैं। जहां दिनभर मेला भी भरता है, लेकिन इस बार कोरोना नियमों के चलते तीज माता की सवारी नहीं निकाली जाएगी। पूर्व राजपरिवार के निजी सचिव नरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि शहर में कोरोना महामारी के फैलाव को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन की पालना कर रहे है। इसी कारण महल चौक से तीज माता की सवारी निकालने का कार्यक्रम निरस्त किया गया है। इस दौरान तीज माता की पूजा फूल बाग पैलेस में की जाएगी। साथ ही लोग अपने घरों में रहकर ही तीज माता की पूजा करेंगे।

1830 से हर साल निकाली जाती है सवारी:  राठौड़ ने बताया कि सन 1830 से हर साल तीज माता की सवारी निकाली जाती है। अलवर में पूर्व महाराजा विनय सिंह के समय से तीज माता की सवारी निकाली जा रही है। इस दौरान आयोजन स्थल पर मेला भरता है। बड़ी संख्या में महिलायेंं तीज माता के दर्शन व सवारी में शामिल होने के लिए आती है।

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