हरियाली तीज: सुहागिनों ने हाथों में मेहंदी रचा लहरिया धारण कर किया सोलह शृंगार

परंपरा रही है कि तीज माता की पारंपरिक सवारी त्रिपोलिया गेट से प्रारम्भ होकर त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार, गणगौरी दरवाजा से होते हुए तालकटोरा पहुंचती थी।

जयपुर. श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरियाली तीज गुरुवार को राजधानी जयपुर समेत पूरे प्रदेश में पारंपरिक रूप से मनाई गई। कोरोना महामारी के कारण इस साल राजधानी जयपुर में निकलने वाली तीज की शाही सवारी तो नहीं निकली, लेकिन महिलाओं ने 16 शृंगार कर लहरिया पहनकर अखंड सुहाग और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखकर माता पार्वती की पूजा अर्चना की। मंदिरों में भगवान को झूले में विराजमान कर लहरिये की पोशाक धारण करवाई गई। साथ ही घेवर का भोग लगाया गया। 

राजधानी जयपुर में हरियाली तीज पर तीज माता की शाही सवारी निकालने की परंपरा रही है, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे के कारण तीज माता की सवारी नहीं निकाली गई। सिटी प्लेस परिसर में पूर्व राजपरिवार के सदस्यों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना और परिक्रमा करवा कर पांरपरिक रस्म निभाई गई। इस दौरान पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने शारीरिक दूरी समेत कोरोना गाइडलाइन की पूरी पालना की। परंपरा रही है कि तीज माता की पारंपरिक सवारी त्रिपोलिया गेट से प्रारम्भ होकर त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार, गणगौरी दरवाजा से होते हुए तालकटोरा पहुंचती थी। इसके अगले दिन बूढ़ी तीज के रूप मे शाही सवारी निकाली जाती थी, लेकिन इस बार कोरोना के कारण 24 जुलाई को बूढ़ी तीज की सवारी भी महल से बाहर नहीं निकलेगी।
तीज के मौके पर प्रदेशभर में सुहागिनों ने लहरिया पहनकर हाथों में मेहंदी रचाई और सोलह शृंगार किया। घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए गए। मंदिरों में भी ठाकुरजी को लहरिया धारण करवा कर घेवर व खीर का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के दर्शन सोशल मीडिया से ही कराए गए। हरियाली तीज पर महिलाओं द्वारा झूले झुलने का रिवाज हैं, लेकिन इस बार सार्वजनिक उद्यानों में कोरोना की रोक के कारण महिलाओं का हुजूम एकत्र नहीं हो सका। कुछ स्थानों पर महिलाओं ने घरों में ही यह रस्म पूरी की।
राजधानी जयपुर गलता तीर्थ में पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य के सान्निध्य में सीताराम जी, रामलला जी और श्रीनिवास भगवान को सुसज्जित झूलों में विराजमान किया गया। गोदा जयंती महोत्सव के तहत यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तुलसी और पुष्पों से नित्य सहस्त्रार्चन किया जा रहा है। गोविंद देव मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुरजी को लहरिया धारण करवा कर घेवर व खीर का भोग अर्पित किया गया। पानों का दरीबा स्थित आचार्य पीठ सरस निकुंज, रामगंज बाजार स्थित मंदिर श्री लाड़लीजी, बड़ी चौपड़ स्थित लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर में भी ठाकुरजी को लहरिया पोशाक धारण करवा कर खीर-घेवर का भोग लगाया गया।

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