नागपंचमी स्पेशल: आज के दिन ही नागवंश में जन्मे थे आयुर्वेद के पितामह!

चरक आयुर्वेद विशारद के रूप में विख्यात हैं। उन्होंने आज के कोराना संक्रमण काल में आयुर्वेद की उपादेयता एवं चिकित्सा सिद्धांत ‘स्वस्थ्यस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमं च’ पर प्रकाश डाला।

नागपंचमी.  जिले में सक्रिय आयुर्वेदिक चिकित्सकों के संगठन नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों ने शनिवार को आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के पितामह महर्षि चरक की जयंती धूमधाम से मनाई गई।
यह आयोजन कोराना संक्रमण काल के कारण सामूहिक रुप से आयोजन न करके अपने-अपने क्लीनिक पर किया गया। कार्यक्रम में भगवान धन्वन्तरि एवं महर्षि चरक के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर सभी चिकित्सकों ने अपने-अपने क्लीनिक पर पूजा अर्चना की।।
सेवानिवृत्त क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डा. सुरेन्द्र मोहन सारस्वत ने इस अवसर पर बताया कि ‘भावप्रकाश संहिता’ के अनुसार चरक का जन्म नागपंचमी के दिन नागवंश में हुआ था।
डा. एस एस तोमर का कहना था कि चरक आयुर्वेद विशारद के रूप में विख्यात हैं। उन्होंने आज के कोराना संक्रमण काल में आयुर्वेद की उपादेयता एवं चिकित्सा सिद्धांत ‘स्वस्थ्यस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमं च’ पर प्रकाश डाला।
प्रदेश नीमा संरक्षक मंडल के सदस्य डा आर वी शर्मा ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आचार्य चरक के योगदान के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि वैसे तो महर्षि चरक ने चरक संहिता में अष्टांग आयुर्वेद का वर्णन किया है, परन्तु चिकित्सा के क्षेत्र में यह ग्रन्थ सर्वश्रेष्ठ है। यदि आम मनुष्य चरक संहिता में वर्णित दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं सदाचार के नियमों का पालन करे तो वह स्वस्थ रह सकता है।
इस अवसर पर एक बेव सेमीनार का आयोजन भी किया गया। इस सेमीनार में डा बिजेंद्र सिंह वर्मा, डा मुनीश वाष्र्णेय,डा उमाशंकर प्रतिहार,डा राकेश कुमार गुप्ता आदि अन्य चिकित्सकों ने अपने विचार रखे।

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