राजस्थान: गहलोत और पायलट के वर्चस्व की लड़ाई के बीच, BSP लाई सियासी संग्राम में नया भूचाल

बसपा ने राजस्थान के उन सभी विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट डालने का व्हिप जारी किया है जो बसपा के सिंबल पर जीते थे। ऐसा नहीं किया तो विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्तगी की कार्यवाही की जाएगी।

नई दिल्ली. राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई विधानसभा से होते हुए पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी की विशेष याचिका और राजस्थान हाईकोर्ट में बसपा विधायकों को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। इस बीच, कांग्रेस कार्यकर्ता राजस्थान को छोड़ पूरे देश में राजभवनों का घेराव करेंगे। बहुजन समाज पार्टी ने राजस्थान के उन सभी विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट डालने का व्हिप जारी कर राज्य के सियासी संग्राम में भूचाल ला दिया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट सोमवार को स्पीकर सीपी जोशी की सचिन पायलट खेमे के विधायकों को भेजे गए नोटिस के मामले पर सुनवाई करेगा। वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट BJP विधायक मदन दिलावर की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ स्पीकर के समक्ष दायर उनकी याचिका में कार्रवाई नहीं होने को चुनौती दी है। दिलावर की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट के जस्टिस महेन्द्र गोयल सुनवाई करेंगे। इसमें विधानसभा स्पीकर, सचिव सहित बसपा के छह एमएलए को भी पक्षकार बनाया गया है।
बसपा ने राजस्थान के उन सभी विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट डालने का व्हिप जारी किया है जो बसपा के सिंबल पर जीते थे। ऐसा नहीं किया तो विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्तगी की कार्यवाही की जाएगी। ये विधायक कांग्रेस में शामिल हो चुके है। इनमें राजेन्द्र गुढ़ा, जोगेन्द्र अवाना, लाखन मीणा, दीपचंद खैरिया, वाजिब अली और संदीप यादव शामिल है। इनको लेकर हाईकोर्ट में BJP विधायक मदन दिलावर ने याचिका दायर की है। विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले दिनों इनके खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया है। पिछले साल सितम्बर में बसपा के छहों विधायकों ने बसपा विधायक दल का कांग्रेस में विलय कर लिया था। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय का पत्र सौंपा गया था, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी थी। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया है।

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