ट्रम्प के वीज़ा फीस बढ़ाने पर अस्थाई अदालत ने लगाई रोक, भारतीय लोगों को मिली बड़ी राहत

अमेरिकी इतिहास में पहली बार शरणार्थी वीज़ा (DHS) चाहने वालों पर भी 50 डालर का शुल्क लगाए जाने के निर्देश थे।

नई दिल्ली।। सैन फ्रांसिस्को डिस्ट्रिक़्ट कोर्ट ने अस्थायी रूप से होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से ग्रीन कार्ड, एच- 1 बी और अन्य वीजा अनुप्रयोगों के लिए थोपी गई भारी शुल्क राशि पर रोक लगा दी है। ट्रम्प प्रशासन की ओर से वीज़ा फ़ीस पर शुल्क राशि पर बढ़ोतरी दो अक्टूबर से लगाए जाने के आदेश दिए गए थे।

फ़ेडरल होमलैंड सिक्योरिटी ने नए शुल्क ढांचे के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की लागत दोगुनी यानी 1,760 से 2,830 डालर, अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने पर शुल्क राशि 725 से बढ़ा कर 1,170 डालर किए जाने के आदेश जारी किए थे।

इसी तरह एच-1बी (H-1B) वीजा के लिए आवेदन शुल्क न्यूनतम 460 से 555 डालर किए जाने के प्रस्ताव थे। अमेरिकी इतिहास में पहली बार शरणार्थी वीज़ा (DHS) चाहने वालों पर भी 50 डालर का शुल्क लगाए जाने के निर्देश थे। अमेरिका में ग्रीन कार्ड, एच-1बी वीज़ा आदि का आवेदन करने वाले देशों में भारतीयों आईटी पेशेवरों की एक बड़ी संख्या होती है।

दुनिया में तीन देश- फ़िजी, ऑस्ट्रेलिया और ईरान शरण चाहने वालों पर शुल्क लगाते हैं। लुथेरन इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी सर्विस के अध्यक्ष और सीईओ कृष ओमैरा विग्नाराजा ने पिछले नवम्बर में ‘बज़फीड न्यूज’ को बताया था कि शरण चाहने वालों के लिए “कुछ ऐसे परिवारों के लिए निषेधात्मक रूप से महंगा हो सकता है, जो सीमा तक पहुंचने में खर्च ख़त्म कर दिया हो।”

उत्तरी कैलिफोर्निया जिला न्यायालय के न्यायाधीश जेफरी व्हाइट ने अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की है। इसके लिए आव्रजन कानूनी संसाधन केंद्र और सात अन्य आप्रवासी अधिकार संगठनों ने याचिका दायर की थी।

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