हमीरपुर: दोहरे हत्याकांड में एक ही परिवार के छह लोगों को हुई उम्रकैद

असलहों से लैस अभियुक्तों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें वह व उसका पुत्र तथा मौदहा कस्बा निवासी देवी सिंह घायल हो गए।

हमीरपुर।। करीब 26 वर्ष पूर्व मौदहा कस्बे के बड़ा चौराहा में पुरानी रंजिश को लेकर चार पहिया वाहन में आए नौ लोगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। घटना में सीओ चालक व आटो चालक की मौके पर मौत हो गई। वहीं तीन लोग घायल हो गए। शुक्रवार को मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश (डकैती) अनिल कुमार शुक्ल की अदालत ने दोहरे हत्याकांड के मामले में एक ही परिवार के छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने सभी अभियुक्तों पर क्रमशः 26100 रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं हत्याकांड के तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है।

जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार शुक्ला ने बताया कि वादी अमीर मोहम्मद निवासी कम्हरिया ने थाना मौदहा में तहरीर दी। जिसमें बताया कि वह व अपने पुत्र जमीलउद्दीन के साथ 17 जनवरी 1995 को जीप बनवाने मौदहा कस्बे के बड़ा चौराहा आया था, जहां चार पहिया वाहनों पर सवार रजीउद्दीन, सईदउद्दीन, पूर्व प्रधान रईसउद्दीन, कुतुबुद्दीन, कलंदर, शरीफउद्दीन, नसीमुद्दीन, अलीमुद्दीन, बुद्धू निवासीगण कम्हरिया आ गए।

असलहों से लैस अभियुक्तों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें वह व उसका पुत्र तथा मौदहा कस्बा निवासी देवी सिंह घायल हो गए। वहीं उनके निकट सरकारी गाड़ी में काम करवा रहे सीओ के चालक अमर सिंह व आटो चालक पप्पू की गोली लगने से मौके पर मौत हो गई थी। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में नौ अभियुक्तों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई।

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी सगे भाई रजीउद्दीन व सईदउद्दीन और नईम अहदम उर्फ बुद्धू की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (डकैती) अनिल कुमार शुक्ल की अदालत में हुई। अदालत ने इस दोहरे हत्याकांड में रईसउद्दीन, कुतुबुद्दीन, कलंदर पुत्र बशीरउद्दीन, इनका भतीजा शरीफउद्दीन पुत्र नईमउद्दीन व नसीमुद्दीन, अलीमुद्दीन पुत्र सईदउद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने सभी अभियुक्तों पर क्रमशः प्रत्येक पर 26100 रुपये का जुर्माना लगाया है।

ज्ञात हो कि सजा पाने वाले आठ आरोपियों में से सहीदुद्दीन और बच्चू की पहले ही मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं मुख्य वादी अमीरूद्दीन उर्फ लल्लू की हत्या भी विगत कई वर्ष पहले हमीरपुर में कर दी गयी थी। बताया जाता है कि घटना के दिन लल्लू हमीरपुर न्यायालय से रिक्शा में पत्नी सहित बसस्टैंड जा रहा था कि तभी उसे गोली मार दी गई थी।पत्नी बच गई थी। आज पच्चीस वर्ष बाद आये फैसले ने लोगों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।

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