बिहार विधानसभा चुनाव: NDA के लिए आसान नहीं है बेगूसराय से पटना की राह

बेगूसराय में एनडीए गठबंधन से जदयू के हिस्से में मटिहानी, साहेबपुर कमाल, चेरिया बरियारपुर और तेघड़ा गया है। जिसमें से सिर्फ मटिहानी सीट पर ही अब तक जीत का सौ प्रतिशत दावा किया जा सकता है।

बेगूसराय।। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने बेगूसराय में सातों विधानसभा क्षेत्र के लिए अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी है। यहां सभी सीटों पर महागठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच आमने-सामने की टक्कर होगी लेकिन बागी और निर्दलीय चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। महागठबंधन और एनडीए से बड़ी संख्या में बागी के सामने आने के बाद दोनों के प्रत्याशियों के विधानसभा पहुंचने की राह बहुत मुश्किल हो गई है।

बेगूसराय में एनडीए गठबंधन से जदयू के हिस्से में मटिहानी, साहेबपुर कमाल, चेरिया बरियारपुर और तेघड़ा गया है। जिसमें से सिर्फ मटिहानी सीट पर ही अब तक जीत का सौ प्रतिशत दावा किया जा सकता है। यहां से जदयू के घोषित उम्मीदवार बोगो सिंह के सामने कोई बागी नहीं है। तेघड़ा से जदयू ने निवर्तमान राजद विधायक वीरेंद्र महतों को प्रत्याशी बनाया है। जिसके बाद से जदयू और भाजपा के कार्यकर्ता काफी विरोध में आ गए हैं। बात करें चेरिया बरियारपुर की तो जदयू ने यहां से सीबीआई कांड के आरोपी मंजू वर्मा को टिकट दिया है। मंजू वर्मा को टिकट मिलने के बाद वहां बहुत विरोध हो रहा है। रालोसपा ने पुराने नेता सुदर्शन सिंह को मैदान में उतारा है तो राजद ने पूर्व सांसद राजवंशी महतो को टिकट दिया है।

साहेबपुर कमाल से जदयू ने भाजपा छोड़कर आए अमर कुमार सिंह को टिकट दिया है। वोट एकजुट होकर एनडीए को मिलेगा और वह श्रीनारायण यादव के समीकरण में सेंंघ लगा पाएंगे, यह कहना मुश्किल है। राजद ने यहां से लगातार विधायक बन रहे श्रीनारायण यादव के पुत्र ललन यादव को मैदान में उतारा है। भाजपा ने भी अपने हिस्से के तीन सीटों पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी है।

बेगूसराय से मेयर उपेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र और गिरिराज सिंह के करीबी कुंदन सिंह को टिकट दिया है। इसके बाद जिले की सबसे हॉट माने जाने वाले इस सीट पर सरगर्मी तेज हो गई है। टिकट के दावेदार कई भाजपा नेता सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं। यहां से संजय गौतम समेत कुछ अन्य भाजपा के नेता बागी प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करेंगे, जो कि एनडीए के लिए परेशानी का सबब बनेगा।

यहां से पूर्व विधायक सुरेंद्र मेहता टिकट के दावेदार थे, उन्हें टिकट मिलता तो पिछड़ा वर्ग का वोट एकजुट मिलने की संभावना थी। लेकिन सुरेंद्र मेहता को नए क्षेत्र बछवाड़ा भेज दिया गया है। जहां की पहले से ही भाजपा कार्यकर्ता स्थानीय प्रत्याशी देने की मांग कर रहे थे।

ऐसे में भाजपा के लिए बछवाड़ा में पहली बार कमल खिलाने की कोशिश पर पानी फिर सकता है। भाजपा के लिए अपने हिस्से की बखरी सीट पर भी विजय पाना मुश्किल होगा। यहां से भाजपा ने राम शंकर पासवान को टिकट दिया है। 2010 में यहां पहली बार कमल खिलाने वाले रामानंद राम को जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने पप्पू यादव की पार्टी जाप ज्वाइन कर लिया है तथा वहां से सिंबल लाकर गांव-गांव में घूम रहे हैं। कुल मिलाकर बेगूसराय में कई हिस्सों में बंटी एनडीए को अपनेे प्रत्याशियों को जिताकर विधानसभा भेजना बहुत मुश्किल हो चुका है। देखना यह है कि राजनीति किस करवट बैठती है।

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