दिल्ली दंगा: मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोपित को हाईकोर्ट ने दी जमानत

कोर्ट ने आरोपित गुलफाम को बीस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दीया। कोर्ट ने आरोपित को अपना मोबाइल नंबर दयालपुर पुलिस के एसएचओ को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली।। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के दौरान एक मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोपित गुलफाम को जमानत दे दी है। एडिशनल सेशंस जज विनोद यादव ने कहा कि आरोपित के बयान के खिलाफ ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे ये पता चले कि उसका अपराध से कोई संबंध है।

कोर्ट ने आरोपित गुलफाम को बीस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दीया। कोर्ट ने आरोपित को अपना मोबाइल नंबर दयालपुर पुलिस के एसएचओ को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आरोपित को अपने मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ये एक हकीकत है कि इस मामले में दूसरे मामले में आरोपित के बयान के बाद पुलिस ने उसे मंडोली जेल से गिरफ्तार किया। दूसरे मामले में कोर्ट ने उसे पिछले 29 सितंबर को जमानत दी थी।

कोर्ट ने कहा कि आरोपित का एफआईआर में नाम नहीं है और न ही उसके खिलाफ कोई विशेष आरोप है। पुलिस ने ऐसा कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं किया जिसमें आरोपित को अपराध से जोड़ा जा सके। इसके अलावा आरोपित के खिलाफ कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित का घर घटनास्थल वाले इलाके में है इसलिए उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी उसी इलाके की है। इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

आरोपित की ओर से वकील अनीश मोहम्मद ने कहा कि आरोपित इस मामले में पिछले 8 मई से न्यायिक हिरासत में है। उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है। आरोपित के खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है। वह दंगाईयों की भीड़ का हिस्सा नहीं था और उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। इस मामले में कोई पहचान परेड भी नहीं हुई है। घटना के बारे में जो सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया है उसमें आरोपित कहीं नहीं दिख रहा है। कॉल रिकॉर्ड डिटेल में आरोपित के लोकेशन का कोई मतलब नहीं है क्योंकि वो उसी इलाके में रहता है। उसके बयान के अलावा कुछ भी उसके खिलाफ नहीं है। उसका पहले का इतिहास साफ-सुथरा रहा है।

आरोपित की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस की ओर से वकील अमित प्रसाद ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि ये मामला चांदबाग और बृजपुरी पुलिया के पास का है जहां से वजीराबाद रोड और करावल नगर रोड तक हिंसा फैली। ये मामला 25 फरवरी का है। आरोपित को 5 मार्च को औपचारिक रुप से मंडोली जेल से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी एक दूसरे केस में उसके बयान के बाद हुआ। उसकी कॉल रिकॉर्ड डिटेल के मुताबिक आरोपित घटनास्थल पर मौजूद था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपित दंगे के तीन दूसरे मामले में भी आरोपित है।

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