गर्म है चर्चा का बाजार: कौन जीत रहा है, कौन हारेगा, किसकी बनेगी सरकार

मतदाताओं से हुए बातचीत पर गौर करें तो बेगूसराय विधानसभा में कांग्रेस उम्मीदवार अमिता भूषण और भाजपा उम्मीदवार कुंदन कुमार के बीच कड़ा मुकाबला है।

बेगूसराय।। आजादी के पूर्व से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राजनीति की प्रखर भूमि रही बेगूसराय में बिहार विधानसभा का चुनाव द्वितीय चरण में संपन्न हो चुका है। लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद चुनावी चर्चा का शोर थमने के बजाय और तेज हो गया है, बस बदल गए हैं तो उसके अर्थ। तीन नवम्बर को मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने से पहले जहां गांव-गांव के बैठका से लेकर शहर के चौक-चौराहों और चाय दुकान तक चर्चा होती थी कि किसे वोट दिया जाए, कौन बेहतर कर सकता है। अब इन जगहों पर रिजल्ट निकाले जा रहे हैं, कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है, किसकी सरकार बन रही। कौन सरकार बनाकर क्या करेगा, जो हारेगा वह क्या करेगा।

इन चर्चाओं में कोई भारी बहुमत से जीत रहा है, तो किसी की जमानत जब्त हो रही है। कोई कह रहा है फिर से नीतीश कुमार की ही सरकार बनेगी, तो कोई कहता है तेजस्वी ने बेरोजगारों के लिए रोजगार का वादा किया तो उसकी ओर झुकाव बढ़ा है, कोई कहता है त्रिशंकु सरकार बनेगी। कुछ लोगों का कहना है की भाजपा नीतीश कुमार को किनारे कर लोजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएगी, तो कुछ लोगों का कहना है कि लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान अपने पिता की तरह ही मौसम वैज्ञानिक हैं और वह तेजस्वी के साथ मिलकर भी सरकार में शामिल हो सकते हैं। चल रहे चर्चा पर गौर करें तो अधिकतर लोग बेगूसराय में महागठबंधन को छह सीट और एनडीए को एक सीट देकर लोजपा को पूरी तरह से आउट कर रहे हैं।

मतदाताओं से हुए बातचीत पर गौर करें तो बेगूसराय विधानसभा में कांग्रेस उम्मीदवार अमिता भूषण और भाजपा उम्मीदवार कुंदन कुमार के बीच कड़ा मुकाबला है। निर्दलीय संजय गौतम और राजेश कुमार ने खूब वोट काटे हैं। शहरी क्षेत्र में अमिता भूषण आगे निकल सकती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कुंदन कुमार को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा किए गए काम का फायदा मिला है, हालांकि कांटे की टक्कर में जीत का अंतर बहुत मामूली होगा। मटिहानी की बात करें तो यहां जदयू उम्मीदवार निवर्तमान विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह तथा लोजपा के उम्मीदवार राजकुमार सिंह के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और जीत हार का अंतर हजार-पांच सौ से अधिक नहीं होगा। लेकिन यहां माकपा उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद सिंह को भी कम नहीं आंका जा सकता है। क्योंकि माय समीकरण ने एकजुट होकर वोटिंग किया है।

तेघड़ा विधानसभ में निवर्तमान विधायक जदयू उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार की हालत बहुत ही दयनीय है। यहां भाकपा उम्मीदवार राम रतन सिंह और लोजपा के उम्मीदवार ललन कुंवर के बीच भीषण मुकाबला हुआ है तथा दोनों में से कौन जीत जाएंगे यह कहना मुश्किल है। बछवाड़ा में भाकपा उम्मीदवार अवधेश कुमार राय और भाजपा उम्मीदवार सुरेन्द्र मेहता के बीच कांटे की टक्कर हुई है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार शिव प्रकाश गरीबदास और इंदिरा गांधी ने वोट को अपने इधर प्रभावित किया है जो सुरेन्द्र मेहता की जीत का कारण बन सकता है। साहेबपुर कमाल में निवर्तमान राजद विधायक श्रीनारायण यादव के पुत्र ललन यादव, जदयू उम्मीदवार अमर कुमार और लोजपा उम्मीदवार सुरेन्द्र विवेक के बीच कांटे की टक्कर हुई है। लेकिन ललन यादव सब पर भारी दिख रहे हैं।

बखरी विधानसभा क्षेत्र में भाकपा उम्मीदवार सूर्यकांत पासवान और भाजपा उम्मीदवार रामशंकर पासवान के बीच टक्कर हुई है। मतदाताओं के मूड के हिसाब से सूर्यकांत पासवान भारी पड़ेंगे। लेकिन राम शंकर पासवान जीत जाएं तो यह किसी आश्चर्य से कम नहीं होगा। चेरिया बरियारपुर में जदयू ने निवर्तमान विधायक मंजू वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन यहां राजद उम्मीदवार राजवंशी महतों और लोजपा उम्मीदवार राखी देवी के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में मंजू वर्मा कहीं दिख नहीं रही है। सातों विधानसभा क्षेत्र के 104 उम्मीदवारों का भाग्य तीन जगहों पर कड़ी सुरक्षा के बीच बज्रगृह में बंद हैं और भाग्य का पिटारा दस नवम्बर को खुलेगा, तब खुलासा हो सकेगा।

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