UP: कुम्हारों के घर अबकी बार खुशियां लेकर आ रहा दीपवाली का पर्व, मिटटी के दियों से उजियारे होगें घर

कानपुर की कुम्हार बस्ती में इन दिनों सुबह से ही अच्छी खासी हलचल देखी जा सकती है। सुबह से इन कुम्हारों के चाक बेजान गीली मिट्टी को नया रूप देते नजर आते हैं।

कानपुर।। इस आधुनिक युग में दीपावली के मौके पर घरों को रोशनी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी मिट्टी के दीए जलाए जाते हैं। इस पुरातन परंपरा के जीवित रहने के कारण ही कुम्हारों के आंगन में परंपरागत रुप से चाक पर दिया का निर्माण होता है। इस वर्ष चाइनीज झालर की बजाय मिट्टी के दीयों की मांग तेज है।

कानपुर की कुम्हार बस्ती में इन दिनों सुबह से ही अच्छी खासी हलचल देखी जा सकती है। सुबह से इन कुम्हारों के चाक बेजान गीली मिट्टी को नया रूप देते नजर आते हैं। दीपावली पर दो पैसे मिलने की चाह में कुम्हारों का यह चाक समय के चक्र की तह निरंतर चला करता है। अबकी बार इन कुम्हारों को पूरी उम्मीद है कि इस बार का यह दीपावली पर्व इनके लिए खुशियों की रोशनी लेकर आएगा और उनकी बिक्री बढ़ेगी। गौरतलब है कि कानपुर में आज भी सैंकड़ों परिवार हैं, जो इन छोटी-छोटी बस्तियों में रह कर इस कारोबार से अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं।

हालांकि, आधुनिकता के इस युग में पारम्परिक दीयों की जगह रोशनी से सराबोर इलेक्ट्रिक दीए और मशीनों से बनी मोमबत्तियों ने ले ली है। जिसकी वजह से यह कारोबार अब खतरे और संकट में है। अब प्रदेश व केन्द्र की सरकार की ओर से समय- समय पर मिलने वाले प्रोत्साहन से अब इन कुम्हारों में भी उम्मीद की किरण जल उठी है। बेजान मिट्टी में जान भरने वाले यह मिट्टी के लाल दिन-रात पूरे परिवार के साथ दीये, लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

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