UP: किसानों को नहीं मिल रहा धान का उचित मूल्य, कैसे होगो दीपावली

गाँव सिदुरिया आलमपुर के कुँअर बहादुर, मन्जू देवी, गाँव अरूसी का पुर्वा के राधेश्याम, केशमपुर के लालबहादुर, अमर सिंह आदि किसानों का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए उसे पूरी तरह सुखाना पड़ता है,

औरैया।। दीपावली का त्यौहार इस बार किसानों के लिए फीका रहने की सम्भावना है, क्योंकि एक ओर सरकारी प्रक्रिया में देरी के कारण सरकारी रेट पर धान बेचना किसानो के लिए मुश्किल हो रहा है। वहीं व्यापारी उनका धान औने पौने दामों पर खरीद रहे हैं। गेंहूँ की बुआई का समय है, धान के खेत को गेंहूँ की बुआई के लिए तैयार करने व दीपावली के त्यौहार हेतु घर के खर्च के लिए किसान को पैसा की आवश्यकता है। इसका फायदा व्यापारी उठा रहे हैं।

गाँव सिदुरिया आलमपुर के कुँअर बहादुर, मन्जू देवी, गाँव अरूसी का पुर्वा के राधेश्याम, केशमपुर के लालबहादुर, अमर सिंह आदि किसानों का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए उसे पूरी तरह सुखाना पड़ता है, जिसमें समय लगता है। बेचने के लिए ऑनलाइन कराने पर उसके सत्यापन में समय लगता है। इसके बाद क्रय केंद्र पर टोकन मिलता है, तब नम्बर आने पर धान बिकता है। बिकने के बाद 72 घण्टे में किसान के खाते में पैसा आने का समय दिया जाता है।

धान की फसल कटने से लेकर पैसा आने तक लगभग आधा महीने का समय लगना मामूली सी बात है। व्यापारी सीधे कम रुपये में खेत से ही धान खरीद रहे हैं।किसानों ने बताया कि मोटा धान 1050 रूपये कुन्टल और महीन धान 14 या 1500 रूपये कुन्टल, जिससे किसानो की लागत भी नही निकल रही है। मजबूरी में किसान अपना धान व्यपारियों को बेच रहे है।

केशमपुर धान क्रय केंद्र के प्रभारी राहुल कुमार ने बताया क़ि उनके पास जो किसान ऑनलाइन सत्यापन कराकर केंद्र पर आ रहे है उनका धान खरीदा जा रहा है। 25 अक्टूबर से क्रय केंद्र शुरू हुआ है। अभी 11 नवम्बर तक लगभग 100 कुन्टल धान की खरीद हो सकी है। इस केंद्र पर एक किसान का सिर्फ 50 कुन्टल धान ही खरीदा जा सकता है।

कुँअर बहादुर, मन्जू देवी का कहना है कि धान बेचने के लिए ऑनलाइन कराया फ़ार्म दस दिन तक सत्यापित नही हो सका। कागजो में कुछ कमी आ गयी है। औरैया जाकर देखना पड़ेगा। तब तक समय से गेंहूँ की बुआई का खर्चा, त्यौहार का खर्चा कैसे चलेगा। अब सूखा धान भी कम रेट पर बेचना पड़ सकता है। सत्यापित समय से हो जाता तो क्रय केंद्र पर धान बिक सकता था।

वहीं, केशमपुर धान क्रय केंद्र भी किसानो को तलाश करना पड़ता है क्योंकि केंद्र के बाहर कोई बैनर नही लगा है।केंद्र गाँव से ही कुछ दूरी पर है। बिल्डिंग के ऊपर एक बैनर लगा है। जिस पर किसानो की नजर नही पड़ती है। किसान केशमपुर गाँव पहुंच जाते है। तलाश करने के बाद केंद्र पर नही लगता है कि यहाँ धान क्रय केंद्र है।किसानो के बैठने का भी कोई पर्याप्त इंतजाम नही है। बिल्डिंग के बाहर एक तख्त और एक कुर्सी रखी है जिस पर केंद्र प्रभारी बैठकर अपना काम करते है किसान खड़े रहकर की अपनी बात करते हैं।

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