Prabhat Vaibhav,Digital Desk : गोरखपुर से चलने वाली गोरखधाम, कुशीनगर, कोचीन और चौरी चौरा एक्सप्रेस ट्रेनों में अब अधिकृत 'रेल नीर' की जगह महंगे लोकल ब्रांड वाली पानी की बोतलें बिक रही हैं। यात्रियों की जेब ढीली हो रही है और वेंडर स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों की परवाह किए बिना बिक्री कर रहे हैं।
जांच में खुली पोल, वेंडर और पेंट्रीकार की मिलीभगत
पिछले सप्ताह विजिलेंस टीम ने प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर खड़ी कुशीनगर एक्सप्रेस के एसी कोचों की जांच की। जांच में पता चला कि पेंट्रीकार का मैनेजर वेंडरों के सहयोग से अनधिकृत लोकल ब्रांड वाली 768 पानी की बोतलें कोचों में लोड करा रहा था। इसी तरह 10 जनवरी को वाणिज्य विभाग की टीम ने प्लेटफॉर्म 9 पर छापेमारी कर 300 बोतलें जब्त की थीं।
लोकल ब्रांड की बिक्री रुकने का नाम नहीं ले रही
वेंडर गोरखपुर से चलने वाली ट्रेनों में धड़ल्ले से लोकल ब्रांड वाली बोतलें बेच रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर वेंडर रेल नीर की जगह लोकल ब्रांड की बोतलें ट्रेनों में लोड करते हैं। दिखावे के लिए पेंट्रीकार में रेल नीर रखी रहती है, लेकिन अंदर बड़ी संख्या में अनधिकृत बोतलें छिपा कर रखी जाती हैं।
यात्री परेशान और रेलवे प्रशासन निष्क्रिय
यात्री जब रेल नीर मांगते हैं, वेंडर साफ मना कर देते हैं और कई बार यात्रियों से मारपीट तक कर देते हैं। रेलवे के पास पर्याप्त मात्रा में रेल नीर उपलब्ध होने के बावजूद यह अवैध कारोबार जारी है। वेंडरों को लोकल ब्रांड वाली बोतलें बेचने में अधिक कमीशन मिलता है, जिससे उनकी मनमानी बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
जानकारों का कहना है कि यह अवैध कारोबार प्लेटफॉर्म 1, 2 और 9 के रास्तों से ठेलों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। आईआरसीटीसी, रेलकर्मी और सुरक्षाकर्मी इस मामले में सीधे या indirekt रूप से जुड़े हो सकते हैं। रेलवे नियम के अनुसार रेल नीर की बिक्री अनिवार्य है और केवल रेल नीर की अनुपलब्धता में ही अन्य अधिकृत ब्रांड बेचे जा सकते हैं।




