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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (ईरान-अमेरिका) में जारी भीषण युद्ध की तपिश अब भारतीय सियासत तक पहुंच गई है। बुधवार देर रात बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर कड़ा प्रहार करते हुए दो टूक कहा कि भारत 'दलाल देश' की भूमिका स्वीकार नहीं करेगा। जयशंकर का यह तीखा बयान उस वक्त आया जब विपक्ष ने पाकिस्तान द्वारा शांति वार्ता की मेजबानी के प्रस्ताव और भारत की भूमिका पर सवाल उठाए। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने देश को आश्वस्त किया है कि युद्ध के बावजूद भारत में ईंधन का संकट नहीं होगा।

ट्रम्प और मोदी की बातचीत का हुआ खुलासा

सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई हालिया फोन कॉल का ब्यौरा मांगा। विदेश मंत्री ने खुलासा किया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह युद्ध अब रुकना चाहिए, क्योंकि इसका खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है। जयशंकर ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका भले ही 1981 से पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत में शामिल करता रहा हो, लेकिन भारत अपनी नीतियों पर अडिग है और वह किसी के प्रभाव में मध्यस्थता नहीं करेगा।

पाकिस्तान की 'शांतिदूत' बनने की कोशिश नाकाम

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने हाल ही में इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने और शांति वार्ताओं की मेजबानी करने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि पाकिस्तान अपनी प्रासंगिकता ढूंढने के लिए ऐसे दिखावे कर रहा है, जबकि भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में स्थिरता और अपने हितों की रक्षा करना है।

देश में तेल-गैस का पर्याप्त भंडार, घबराने की जरूरत नहीं

युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। नए भंडार भी लगातार आ रहे हैं, इसलिए जनता को पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है।

विपक्ष की तल्खी बरकरार, संसद में चर्चा की मांग

सरकार के आश्वासनों के बावजूद विपक्ष पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने सरकार की प्रतिक्रिया को 'असंतोषजनक' करार दिया। विपक्षी दलों ने मांग की है कि पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत विस्तृत चर्चा की जाए। विपक्ष का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए।