Prabhat Vaibhav, Digital Desk : संसद में महिला आरक्षण विधेयक (नारीशक्ति वंदन अधिनियम) के विफल होने के बाद छिड़ी सियासी जंग अब और तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्षी दलों पर किए गए तीखे हमले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार (19 अप्रैल 2026) को उन पर पलटवार किया। ममता बनर्जी ने पीएम के संबोधन को 'पाखंडी' और 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ममता बनर्जी के पलटवार की 4 बड़ी बातें
1. "3 साल तक क्यों किया इंतजार?"
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सरकार वाकई इस नेक काम को लेकर गंभीर थी, तो 28 सितंबर, 2023 को विधेयक पारित होने के बाद तीन साल तक इंतजार क्यों किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इसे जल्दबाजी में लाना और परिसीमन से जोड़ना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है।
2. टीएमसी में महिलाओं की सबसे अधिक भागीदारी
प्रधानमंत्री द्वारा टीएमसी पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए ममता ने आंकड़े पेश किए:
लोकसभा: टीएमसी के निर्वाचित सदस्यों में 37.9% महिलाएं हैं।
राज्यसभा: टीएमसी ने 46% महिला सदस्यों को मनोनीत किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी ने हमेशा महिलाओं के उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है और विरोध का सवाल ही नहीं उठता।
3. परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध
मुख्यमंत्री ने 'परिसीमन' (Delimitation) को संघीय लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा:
"मोदी सरकार महिलाओं को ढाल बनाकर अपने स्वार्थ साधने के लिए राजनीतिक सीमाओं में हेरफेर कर रही है।"
उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा शासित राज्यों को अन्य राज्यों की कीमत पर अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए यह साजिश रची जा रही है, जिसका वे चुपचाप विरोध नहीं करेंगी।
4. प्रधानमंत्री को 'कायरतापूर्ण' रवैये पर घेरा
ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को संसद के भीतर बहस करने की चुनौती दी:
"प्रधानमंत्री जी, अगली बार राष्ट्र को संबोधित करने के बजाय संसद के मंच से बोलने का साहस दिखाएं, जहाँ आप जवाबदेही और चुनौती का सामना कर सकें।"
उन्होंने कल के संबोधन को कायरतापूर्ण और कपटपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अब महसूस हो रहा है कि सत्ता उनके हाथों से फिसल रही है।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ा विवाद?
18 अप्रैल 2026 को संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक तकनीकी और राजनीतिक गतिरोध के कारण पारित नहीं हो सका। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष को 'नारी शक्ति' का विरोधी करार दिया था। ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उसी नैरेटिव को काटने की कोशिश मानी जा रही है, विशेषकर पश्चिम बंगाल और अन्य गैर-भाजपा शासित राज्यों के हितों को लेकर।
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