Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चंडीगढ़ (पंजाब/हरियाणा) में भवन दुरुपयोग (building misuse) से जुड़ी नोटिसों को लेकर अब बड़े सवाल उठने लगे हैं। सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन जैसे सामाजिक समूहों ने प्रशासन द्वारा जारी किए जा रहे लगभग 5,000 से अधिक दुरुपयोग‑नोटिसों की वैधता और आधार पर फैक्ट‑चेक अभियान शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इन नोटिसों के पीछे की प्रक्रिया और मानदंडों को जनता के सामने पारदर्शी रूप से लाने की आवश्यकता है।
ये नोटिसें उन भवनों और परिसरों को दी जा रही हैं जिनमें अनधिकृत निर्माण, मान्यता से बाहर का इस्तेमाल या नियम उल्लंघन पाया गया है। इन नोटिसों के साथ अक्सर बड़ी मोटी दंड‑राशि (penalty) भी जुड़ी होती है, जिसकी गणना कई वर्षों से हो रही है और कई मामलों में यह रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है।
बिजनेस समूहों और नागरिक संगठनों का कहना है कि नोटिसों की वैधता और उन पर लगाई जाने वाली दंड‑राशि का आधार स्पष्ट नहीं है, जिससे लोगों में भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने फैक्ट‑चेक कैंपेन से जनता को यह समझाने की कोशिश शुरू कर दी है कि नोटिस किस आधार पर जारी किए जा रहे हैं, क्या नियम हैं और क्या हर नोटिस कानून के अनुरूप है या नहीं।
चंडीगढ़ प्रशासन पहले ही प्रस्ताव भेज चुका है कि भवन उल्लंघन पर लगे कठोर दंड नियमों (penalty structure) को संशोधित किया जाए ताकि इन हजारों मामलों में राहत मिल सके और प्रक्रिया में सुधार हो। इन नोटिसों के मसले को लेकर लंबे समय से भवन मालिक और व्यापार समुदाय शिकायत कर रहे हैं कि दंड बहुत कड़ा और असमानतापूर्ण है।
इस पूरे विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया, दंड की गणना और नियम की वैधता जैसी चीजों पर लोगों के मन में गंभीर प्रश्न हैं और उन्हें जवाब की तलाश है। ऐसे में फैक्ट‑चेक अभियान एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है ताकि लोगों को सही जानकारी मिले और न्यायसंगत समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकें।




