Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ऋषिकेश के बापूग्राम वन भूमि विवाद ने एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। इस मुद्दे पर शनिवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद धरना स्थल पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ना किसी भी हाल में उचित नहीं है और यह पाप के समान है।
धरने में शामिल हुए पूर्व सीएम हरीश रावत
बापूग्राम में वन भूमि प्रकरण को लेकर चल रहे धरने में शामिल होते हुए हरीश रावत ने कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंदवर्धन के सामने प्रभावित लोगों की पीड़ा को मजबूती से रखेंगे, ताकि कोई मानवीय और स्थायी समाधान निकल सके।
आंदोलन को कमजोर न पड़ने देने की अपील
धरने और आमसभा में वक्ताओं ने कहा कि एकता में ही सबसे बड़ी ताकत होती है। दो फरवरी को निकाली गई ऐतिहासिक महारैली का जिक्र करते हुए कहा गया कि हजारों लोगों की मौजूदगी ने सरकार और शासन को जनभावनाओं का स्पष्ट संदेश दिया है। वक्ताओं ने चेताया कि यह जोश ठंडा नहीं पड़ना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए लगातार आंदोलन जारी रहना जरूरी है।
राजस्व ग्राम की मांग वर्षों से लंबित
बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि राज्य गठन के समय से ही बापूग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने क्षेत्रवासियों से एकजुट होकर संघर्ष को और मजबूत करने की अपील की।
सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
आमसभा को संबोधित करते हुए राजपाल खरोला ने कहा कि अब तक सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के पक्ष में कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया है। इसी वजह से लोगों को महारैली निकालनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग सड़कों पर उतरे तो सरकार और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बना, और यही दबाव लगातार बनाए रखना जरूरी है।
लगातार होंगे विरोध कार्यक्रम
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि हर दूसरे-तीसरे दिन मशाल रैली, कैंडल मार्च और अन्य शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि सरकार तक जनता की आवाज लगातार पहुंचती रहे। आंदोलन की अब तक की सफलता का श्रेय पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दिया गया। संघर्ष समिति की ओर से धरना स्थल पर लोगों को धूप से राहत देने के लिए टेंट की व्यवस्था भी की गई है।




