Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल से रिहा होने के बाद लापता हो गया है। उसके पश्चिमी यूपी में छिपे होने और नेपाल के रास्ते विदेश भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस की पांच टीमें 15 जिलों में दबिश दे रही हैं। महाराजगंज जिले की सीमा पर भी एक टीम डेरा डाले हुए है।
जेल से फरार और कोर्ट की नाराजगी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने बी-वारंट के बावजूद रवि काना को बांदा जेल से रिहा करने पर जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। रवि काना के खिलाफ 2026 में दर्ज मामलों में तीन गंभीर धाराएं शामिल हैं। रिहाई के बाद उसकी लोकेशन का पता नहीं चल पाया है।
92.65 करोड़ की संपत्ति जब्त
गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने माफिया रवि के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए लगभग 92.65 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त और कुर्क की है। इसके अलावा उसके करीबियों और गिरोह के पुराने सदस्यों पर भी पुलिस की नजर है।
अवैध कारोबार और गैंग का सरगना
रवि संगठित अपराधी गिरोह का लीडर है, जिसका गैंग नंबर डी-190 है। गैंग में 18 सदस्य शामिल हैं। जांच में पाया गया कि गिरोह अवैध रूप से स्क्रैप और सरिया का कारोबार करता था, जिसमें धमकी, चोरी और लूट जैसी वारदातें शामिल थीं। रवि काना और उसके परिवार के नाम पर दर्ज कंपनियों में प्राइम प्रेसिंग टूल्स, न्यू कृष्णा स्टील, एस्कोन एक्सपोर्ट, हनुमत मैटल, अकीरा स्टेट्स और जेएसआर रोड लाइन्स शामिल हैं।
विदेश भागने की कोशिश
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रवि ने एक मामले में अग्रिम जमानत लेते समय न्यायालय की शर्तें तोड़ीं और पासपोर्ट जमा न कर 1 जनवरी 2024 को विदेश फरार हो गया था। उसे 24 अप्रैल 2024 को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
कानून और जेल प्रशासन पर सवाल
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत के बी-वारंट के बिना किसी आरोपी को रिहा करना अवैध है। जेल मैनुअल के अनुसार बंदी की रिहाई केवल लिखित न्यायालय आदेश पर ही संभव है। रवि काना के खिलाफ गैंग्स्टर एक्ट, हत्या, लूट, धोखाधड़ी, रंगदारी सहित कुल 29 गंभीर मामले दर्ज हैं, जबकि उसके 18 सहयोगियों पर 131 मामले दर्ज हैं।




