Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की एक हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक महज एक औपचारिक चर्चा नहीं थी, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक 'ब्लूप्रिंट' तैयार करने का जरिया बनी। ईरान-अमेरिका संघर्ष की शुरुआत के बाद सीसीएस की यह तीसरी बड़ी बैठक है, जो दर्शाती है कि केंद्र सरकार स्थिति को लेकर कितनी गंभीर है।
पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला पर सरकार की पैनी नजर
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भारत पर पड़ने वाला आर्थिक प्रभाव रहा। प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ लंबी मंत्रणा की। सरकार का सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि वैश्विक युद्ध की स्थिति में भी देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। आईएमडी और अन्य वैश्विक इनपुट्स के बीच सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और आम जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
बिजली और खाद्य सुरक्षा: कोयले से लेकर खरीफ की तैयारी तक समीक्षा
बैठक में केवल सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि घरेलू सुरक्षा के स्तंभों—खाद्य और बिजली—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कोयले के भंडार की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। इसके साथ ही, किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों (Fertilizers) की उपलब्धता और आगामी खरीफ तथा रबी सीजन की तैयारियों का जायजा लिया गया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्थाएं पहले ही पुख्ता कर ली हैं, जिससे किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर भारत की खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति: भारत का अगला कदम
राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं। 1 अप्रैल को हुई पिछली बैठक के बाद से भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों (Trade Routes) को सुरक्षित कैसे रखा जाए।
आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) में भी लिए गए बड़े फैसले
सीसीएस की बैठक के तुरंत बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की भी बैठक हुई। इसमें युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाली महंगाई को नियंत्रित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर मुहर लगने की संभावना है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की अर्थव्यवस्था को किसी भी झटके से बचाने के लिए 'प्लान-बी' पर काम कर रही है।
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