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उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के भीतर विगत कुछ महीनों से ऊपरी माल की कमाई से "फैटी लीवर" जैसी हो चुकी व्यवस्था की ओवरहालिंग का काम जारी है। मिस्त्री बनकर नये निदेशक विशाल सिंह इस वक्त विभागीय नट-बोल्ट बदलने में लगे हैं। निदेशक सूचना की कवायद है कि विभागीय काम का संचार सुचारू रूप से हो और पारदर्शिता रहे। 

निदेशक ने जैसे ही अब तक मोटा आयली माल कमाने वाले मीडिया गिरोह बाजों और ब्लैकमेलरों के "फैटी लीवर" को ठीक करने के लिए "लिव-52" देना आरंभ किया तो विभाग से लेकर विभाग के बाहर तक बेईमानों का शार्ट सर्किट हो गया। अब कुछ कट-पीस स्तर के दलाल पत्रकार मैदान ए जंग में कूद चुके हैं..!! निदेशक विशाल सिंह के खिलाफ खबरें प्लांट कराई जा रही हैं, मजेदार बात यह है खबरों में वह तथ्य रखें जा रहे हैं जो निदेशक, सूचना पूर्व में ही सरकार को दे चुके हैं। 

निदेशक, सूचना ने पद संभालते ही सबसे पहले मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्डों की फर्जी फिकेशन को रोका और वर्ष, 2025 में मान्यता प्राप्त पत्रकारों को जो कार्ड दिए गये हैं उसमें क्यूं आर कोड़ दिया गया हैं। इससे मान्यता कार्ड की डुप्लीकेसी रुक गई। इससे एक बड़ा गैंग प्रभावित हुआ है। इसके बाद निदेशक ने उन लोगों की लिस्ट तलब की जो विभाग में काम तो करते हैं लेकिन अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अखबार निकाल कर हर साल मोटा विज्ञापन डकार जाते हैं। इससे भी ज्यादा बिलबिलाहट उन मठाधीश पत्रकारों को हुई जो बाकायदा विज्ञापन का ठेका लेकर एक-साथ 10-20 चिट्ठियां लेकर आया करते थे और बीच में 40% तक कमीशन वसूल कर मौज मनाते थे.!!! सबसे बड़ी चोट यही थी....!!! 

प्राप्त जानकारी के अनुसार फिल्म बंधु में फिल्म सब्सिडी का पूरा का पूरा काकस निदेशक ने नेस्तनाबूद कर दिया। यहां एक पूरा का पूरा गिरोह सक्रिय था जिसके टांके मुंबई तक भिड़े थे....!! 

एक के बाद एक धवस्त होती दीमकों की बांबियों से परेशान कुछ चिंदी चोरों ने "कीचड़ पत्रकारिता" आरंभ की। ये वही पत्रकार हैं जिनकी कमाई कुछ नहीं लेकिन मलिहाबाद के बागों से लेकर गोमतीनगर और डालीबाग तक आफिस और अन्य अकूत सम्पत्ति अर्जित की गई...!! 

जो पत्रकार खुद दूसरों की आय खोजते टहल रहे हैं अगर उनकी खुद की माली सम्पत्ति की जांच हो गई तो अखबार दूर की कौड़ी है एक पैम्फलेट भी छापना दूभर हो जाएगा....! फिलहाल उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में इस वक्त निदेशक,  सूचना फिनायल से धुलाई करते हुए दीमक मारने की दवा का छिड़काव कर रहे हैं।