Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हिंदू कैलेंडर में कुछ दिन ऐसे होते हैं जिन्हें 'स्वयंसिद्ध' या 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, और उनमें सबसे ऊपर नाम आता है अक्षय तृतीया का। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। साल 2026 में यह महापर्व 19 और 20 अप्रैल को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य या निवेश कभी खत्म नहीं होता, इसीलिए इसे 'अक्षय' कहा जाता है।
अक्षय तृतीया 2026: कब है शुभ मुहूर्त?
इस वर्ष तिथियों के गणना के अनुसार, अक्षय तृतीया का विस्तार 19 अप्रैल से शुरू होकर 20 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान सोना खरीदना, विवाह करना, नया वाहन लेना या गृह प्रवेश करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिसमें आराधना करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
परशुराम जन्मोत्सव से गंगा अवतरण तक: क्यों मनाई जाती है 'अखा तीज'?
अक्षय तृतीया के महत्व के पीछे कई गहरी पौराणिक मान्यताएं छिपी हैं, जो इसे अन्य त्योहारों से अलग बनाती हैं:
परशुराम जयंती: इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
गंगा का धरती पर आगमन: राजा भागीरथ की हजारों वर्षों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य: अक्षय तृतीया को ही देवी अन्नपूर्णा का जन्म दिवस माना जाता है, इसीलिए इस दिन रसोई और अनाज की पूजा का विशेष विधान है।
कुबेर को मिला वरदान: कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी दिन कुबेर को माता लक्ष्मी की साधना करने का आदेश दिया था, जिससे उन्हें 'धनपति' का स्थान प्राप्त हुआ।
महाभारत और अक्षय पात्र का रहस्य
धर्मग्रंथों के अनुसार, अक्षय तृतीया का संबंध महाभारत काल से भी है। वनवास के दौरान जब पांडवों के सामने भोजन का संकट आया, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें 'अक्षय पात्र' भेंट किया था। इस पात्र की विशेषता यह थी कि इसमें रखा भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। यही कारण है कि इस दिन दान देने से पुण्य में कई गुना वृद्धि होती है और घर के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।
शुभ कार्यों के लिए क्यों है यह 'अबूझ मुहूर्त'?
अक्षय तृतीया को शास्त्रों में 'अबूझ' मुहूर्त कहा गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य (जैसे शादी, मुंडन या सगाई) के लिए पंडित से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरा दिन ही हर प्रकार के शुभ काम के लिए सिद्ध होता है। विशेष रूप से सोने और चांदी की खरीदारी को इस दिन 'महालक्ष्मी' के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यदि आप भी निवेश या नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो 19 और 20 अप्रैल 2026 का दिन सर्वोत्तम है।
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