अफ़ग़ानिस्तान : Taliban की वापसी से दहशत में दक्षिण और मध्य एशियाई देश

Taliban के सत्ता में काबिज होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान बन सकता है खूंखार इस्लामिक चरमपंथी संगठनों का नया ठिकाना

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। खूंखार तालिबान (Taliban) अफ़ग़ानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में कब्जा कर चुका है। जल्द ही वह जर्जर हो चुके इस पूरे अशांत देश पर कब्जा कर लेगा। अफ़ग़ानिस्तान में दोबारा तालिबान की सत्ता स्थापित होने की संभावनाओं से दक्षिण और मध्य एशियाई देशों में दहशत का माहौल है। कई देशों की सरकारों ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा रही हैं। इन देशों को आशंका है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान (Taliban) की वापसी से पूरे क्षेत्र में इस्लामिक आतंकवाद का तेजी से प्रसार होगा और खून-खराबा भी बढ़ेगा। तालिबान को लेकर भारत की चिंताएं अधिक हैं। गत रविवार को ही कश्मीर, यूपी और पश्चिम बंगाल से अलक़ायदा से जुड़े कई संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है।

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इस्लामिक आतंकवाद पर नजर रखने वालों का कहना है कि तालिबान (Taliban) अफ़ग़ानिस्तान की बागडोर एक बार फिर से संभालने वाला है। दो दशकों बाद अफ़ग़ानिस्तान में एक बार फिर तालिबान के काबिज होने के बाद इस्लामिक स्टेट समेत दुनिया के सभी खूंखार इस्लामिक चरमपंथी संगठन दक्षिण और मध्य एशिया में अपना नया ठिकाना बना सकते हैं। ऐसे चरमपंथी संगठनों को तालिबान से सरंक्षण और सहयोग दोनों मिलेगा। पाकिस्तान और चीन जैसे देश भी ऐसे संगठनों की मदद करेंगे।

हाल ही में मध्य एशिया में कई ऐसी घटनाएं हुई जब सैकड़ों की संख्या में अफगानी सैनिकों को तालिबान (Taliban) के हमलों से जान बचाने के लिए ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान में पनाह लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। आम अफगानी नागरिक खासकर महिलायें दहशत में हैं। इसलिए तालिबान की अमानवीयता का नमूना देख चुके लोग नहीं चाहते कि अफगानिस्तान में एक बार फिर बर्बर तालिबान काबिज हो।
इसके अलावा तालिबान (Taliban) को सत्ता में काबिज होने से दक्षिण और मध्य एशियाई देशों में अफ़ग़ानिस्तान से शरणार्थियों का सैलाब आ सकता है। अफगानिस्तान में रह रहे ल्हाखों हिन्दू, सिक्ख और ईसाई जान बचाकर भारत आने के लिए मजबूर होंगे। विशेषज्ञों ने इस संभावित समस्या को लेकर चेतावनी भी दी है। ये स्थिति दक्षिण और मध्य एशिया के देशों की पहले से खस्ताहाल अर्थव्यवस्थाओं के लिए ये एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

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