कैबिनेट विस्तार के बाद अब 'मिशन 2027' की बारी, उन 60 सीटों पर टिकी नजरें जहां खिलाना है कमल
Up kiran, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। योगी कैबिनेट के हालिया विस्तार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा ध्यान 2027 के विधानसभा चुनावों पर केंद्रित कर दिया है। विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का समय बचा है, ऐसे में भाजपा ने उन 'अजेय' दुर्गों को ढहाने की योजना बनाई है, जहां पार्टी पिछले तीन चुनावों (2012, 2017, 2022) से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, असम में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश भाजपा की एक हाई-लेवल मीटिंग होने वाली है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी उन 50 से 60 सीटों पर विशेष रणनीति साझा करेंगे, जो भाजपा के लिए अब तक 'अभेद' रही हैं।
पूर्वांचल और पश्चिम यूपी की इन 60 सीटों का 'गणित' क्या है?
भाजपा ने जिन 60 सीटों को अपनी 'रेड लिस्ट' में रखा है, उनमें सबसे ज्यादा चुनौती पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से मिल रही है। इन सीटों का ब्योरा कुछ इस प्रकार है:
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पूर्वांचल का मोर्चा: करीब 22 सीटें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जिलों में हैं। यह वही क्षेत्र है जहां 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने क्लीन स्वीप जैसी स्थिति पैदा कर दी थी।
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पश्चिम यूपी की चुनौती: सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों की 13 सीटों पर भाजपा का विशेष फोकस है। ये सीटें मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल हैं, जहां ध्रुवीकरण और विपक्षी एकजुटता भाजपा के लिए बड़ी बाधा रही है।
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सपा के गढ़ में सेंध: 2022 में समाजवादी पार्टी ने इन लक्षित 35 सीटों में से 22 पर कब्जा किया था। अब भाजपा की योजना मैनपुरी, फर्रुखाबाद और इटावा जैसे 'समाजवादी दुर्ग' में सेंध लगाने की है।
बूथ लेवल की नई घेराबंदी: 'पन्ना प्रमुखों' को मिलेगी नई जिम्मेदारी
भाजपा की जीत का सबसे बड़ा मंत्र हमेशा से उसका 'बूथ मैनेजमेंट' रहा है। इस बार भी पंकज चौधरी की कमेटी ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का आदेश दिया है। पार्टी का मानना है कि अगर इन 60 कमजोर सीटों में से आधी यानी 30 सीटें भी भाजपा के खाते में आ जाती हैं, तो 2027 का रास्ता बेहद आसान हो जाएगा।
रणनीति यह है कि इन क्षेत्रों में न केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों (लाभार्थी वर्ग) को जोड़ा जाए, बल्कि स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को भी मौका दिया जाए।
विपक्ष की मजबूती और भाजपा की आक्रामक तैयारी
समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनाव में पूर्वी यूपी के मऊ और गाजीपुर जैसे जिलों में शानदार प्रदर्शन किया था, जिससे भाजपा को सीटों का नुकसान हुआ था। भाजपा अब 'रिएक्टिव' के बजाय 'प्रो-एक्टिव' मोड में है। पश्चिम बंगाल और असम के रुझानों से उत्साहित योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम अब यूपी में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है—अपने गढ़ बचाओ और दुश्मन के किले में कमल खिलाओ।