अंधविश्वास का खौफनाक अंजाम: आंख फड़कने को 'अपशगुन' मान खुद को मारे थप्पड़, चली गई आंखों की रोशनी
अंधविश्वास कभी-कभी इंसान पर कितना भारी पड़ सकता है, इसका एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। अक्सर लोग आंख फड़कने को भविष्य की किसी अनहोनी या अपशगुन से जोड़कर देखते हैं और पुराने टोटकों पर भरोसा करने लगते हैं। लेकिन इस बार एक व्यक्ति के लिए यह अंधविश्वास जीवन भर का दर्द बन गया। आंख फड़कने की मामूली समस्या को दूर करने के चक्कर में उस व्यक्ति ने खुद को इतने जोरदार थप्पड़ मारे कि उसे अपनी आंखों की रोशनी से हाथ धोना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, यह घटना यह साबित करती है कि बिना वैज्ञानिक आधार के किए गए उपाय कितने खतरनाक हो सकते हैं।
क्या थी पूरी घटना और कैसे हुआ यह नुकसान
पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों से लगातार अपनी आंख फड़कने की समस्या हो रही थी। समाज में फैली पुरानी मान्यताओं के प्रभाव में आकर उसने इसे किसी बड़ी मुसीबत का संकेत मान लिया। समस्या को तुरंत 'ठीक' करने के लिए उसने एक बेहद अजीब और घातक रास्ता चुना। उसने अपनी फड़कती हुई आंख और उसके आसपास के हिस्से पर ताबड़तोड़ थप्पड़ मारना शुरू कर दिया, ताकि फड़कन बंद हो जाए। तेज प्रहार के कारण आंख के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर चोट लग गई, जिससे रेटिना डैमेज हो गया और अचानक हुई इस ट्रॉमा (Trauma) के चलते उसे धुंधला दिखना शुरू हो गया और धीरे-धीरे उसकी रोशनी पूरी तरह चली गई।
आंख फड़कने का वैज्ञानिक कारण और सही सलाह
मेडिकल साइंस के अनुसार, आंख फड़कना (Eye Twitching) जिसे 'मायोकेमिया' (Myokymia) भी कहा जाता है, कोई अपशगुन नहीं, बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। यह अक्सर थकान, नींद की कमी, तनाव, अत्यधिक कैफीन का सेवन या स्क्रीन के लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण मांसपेशियों में होने वाली एक अनैच्छिक ऐंठन है। डॉक्टर इसे किसी भी तरह से शारीरिक प्रहार से ठीक करने की सलाह नहीं देते। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आंख लगातार फड़क रही है, तो सबसे पहले अपनी जीवनशैली में सुधार करें, पर्याप्त नींद लें और आंखों को आराम दें। यदि समस्या फिर भी बनी रहती है, तो किसी अच्छे नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) को दिखाना ही एकमात्र सही और सुरक्षित विकल्प है। ऐसे अंधविश्वासों से बचें और शारीरिक समस्याओं का इलाज हमेशा विज्ञान के जरिए ही कराएं।