कानपुर के जिला अस्पताल में दो माह से नहीं है एंटी रेबीज वैक्सीन, मरीजों को हो रही परेशनी

जनपद के जिला अस्पताल उर्सला, केपीएम और कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगती है। इन सभी जगहों पर इन दिनों वैक्सीन पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।

कानपुर।। जनपद के जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में इन दिनों एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) खत्म हो गयी है। ऐसे में कुत्ता, बंदर, सुअर के काटने पर मरीजों को नर्सिंगहोम या क्लीनिक की ओर रुख करना लाजिमी है और मरीजों की जेब भी ढ़ीली करनी पड़ रही है। हालांकि अभी दो दिन पहले तक कांशीराम ट्रामा सेंटर में वैक्सीन उपलब्ध थी पर अब वहां भी खत्म हो गयी है। जिला अस्पताल उर्सला की बात करें तो यहां पर दो माह से रोजाना ऐसे मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन को पत्र लिखा जा चुका है और वैक्सीन आते ही मरीजों को फिर लगाना शुरु कर दिया जाएगा।

जनपद के जिला अस्पताल उर्सला, केपीएम और कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगती है। इन सभी जगहों पर इन दिनों वैक्सीन पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। ऐसे अगर कोई एंटी रैबीज वैक्सीन सरकारी अस्पताल में लगवाना चाहता है तो उम्मीद पूरी तरह छोड़ दें। कारण यह है कि न सिर्फ जिला अस्पताल उर्सला समेत दो अन्य अस्पतालों में जहां पर वैक्सीन लगती थी वहां पर वैक्सीन ही खत्म हो चुकी है। इंजेक्शन लगने वाले कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर दी गई है। ऐसे में वैक्सीन लगवाने के लिए संबंधित सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों को मायूसी ही हाथ लग रही है।

वैक्सीन की इस समय कितनी जरुरत है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन सभी अस्पतालों में औसतन प्रतिदिन करीब 50 मरीज पहुंचते हैं। लगातार मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

यहां शहर के अलावा फतेहपुर, उन्नाव, कानपुर देहात, हमीरपुर आदि क्षेत्रों से लोग दिखवाने और इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं। कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में दो दिन पहले तक वैक्सीन लग रही थी पर अब वहां भी खत्म हो गयी है। जिला अस्पताल उर्सला और केपीएम में करीब दो माह से वैक्सीन नहीं है। जिला अस्पताल उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अनिल निगम ने शुक्रवार को बताया कि करीब दो माह से वैक्सीन नहीं है और शासन को पत्र लिखकर मांग की गयी है, पर अभी तक वैक्सीन नहीं पहुंच पायी है। केपीएम के सीएमएस ने बताया कि लाेग परेशान हो रहे हैं। उन्हें बाहर से वैक्सीन लानी पड़ रही है। जल्द ही स्टॉक आ जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जिस कंपनी की वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में आती है, वह अभी स्टॉक की सप्लाई नहीं कर पा रही है। कुछ अधिकारी दूसरी कंपनी से भी बातचीत कर रहे हैं।

निजी मेडिकल क्षेत्र के लोग उठा रहें फायदा–

सरकारी अस्पतालों से एंटी रैबीज वैक्सीन नदारद होने का पूरा लाभ निजी मेडिकल स्टोर संचालक उठा रहे हैं। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में निशुल्क एंटी रैबीज वैक्सीन लगती है जबकि मेडिकल स्टोरों पर लगभग साढ़े तीन सौ रुपये में यह वैक्सीन मिलती है। सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन न होने के चलते निजी मेडिकल स्टोरों द्वारा लगभग साढ़े चार सौ में बिक्री की जा रही है। मजबूर होकर मरीजों को अधिक दाम पर लेना भी पड़ रहा है। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लाभ तो मिल ही जाता है।

वहीं सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों में नाराजगी है। मरीजों ने मांग की है कि उन मेडिकल स्टोर संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए जो अधिक दाम पर बिक्री कर रहे हैं। बताते चलें कि शहर के कई मोहल्लों में कुत्ते और बंदरों की पूरी फौज रहती है। इसमें रावतपुर, नवाबगंज, विष्णुपुरी, कल्याणपुर, बाबूपुरवा, यशोदा नगर, आवास विकास, किदवई नगर, चकेरी आदि क्षेत्र शामिल हैं। यह समूह में रहते हैं और दोड़ाकर काटते हैं।

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