कृषि कानून के खिलाफ अवॉर्ड वापसी, इन दिग्गज नेताओं ने राष्ट्रपति को लौटाया पद्म सम्मान

इससे पहले शिरोमणि अकाली दल कृषि कानूनों के मुद्दे पर केंद्र से समर्थन वापस लेते हुए गठबंधन भी तोड़ चुका है। उनके अलावा अकाली दल के नेता रहे सुखदेव सिंह ढींढसा अभी अपना पद्म भूषण सम्मान लौटाने की बात कही है।

चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गुरुवार को एक अहम फैसला लेते हुए भारत के राष्ट्रपति को अपना पद्म विभूषण लौटा दिया। बादल ने इस संबंध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पत्र भी लिखा है। बादल को वर्ष 2015 में यह सम्मान दिया गया था जिसे उन्होंने पंजाब के कामगारों को समर्पित किया था। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल कृषि कानूनों के मुद्दे पर केंद्र से समर्थन वापस लेते हुए गठबंधन भी तोड़ चुका है। उनके अलावा अकाली दल के नेता रहे सुखदेव सिंह ढींढसा अभी अपना पद्म भूषण सम्मान लौटाने की बात कही है।
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राष्ट्रपति को लिखे पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि हरित क्रांति और श्वेत क्रांति में पंजाब की भूमिका अहम रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना काल में कृषि कानून लागू कर दिए गए। जिन लोगों (किसानों) के लिए यह कानून बनाए गए हैं उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। कानून बनाने से पहले किसान संगठनों के साथ बातचीत की जानी चाहिए थी। बादल ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से पूरे देश के किसान आंदोलन की राह पर हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
बादल ने कहा कि यह कानून लागू होने से पंजाब की किसानी पूरी तरह से तबाह हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मेरी वचनबद्धता पंजाब की जनता के साथ है जिन्होंने मुझे मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचाया। बादल ने पद्म विभूषण जैसे सम्मान तभी शोभा देते हैं, जब पंजाब की जनता खुश और खुशहाल हो। पंजाब के लोग आज परेशान हैं। उनकी सुनवाई कोई नहीं कर रहा है। राज्य के 70 फीसदी लोग खेती तथा इससे जुड़े सहायक धंधों के साथ सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
बादल ने कहा कि वह भी पेशे से किसान हैं। कड़ाके की ठंड में उनके साथी सड़कों पर हों, यह उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों के हित तथा कृषि कानूनों के विरोध में भारत सरकार को अपना पद्म विभूषण लौटा दिया है।

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