बड़ी खबर: दिल्ली हिंसा के मुख्य आरोपी अनवर हुसैन को मिली जमानत

सुनवाई के दौरान आरोपित की ओर से वकील एस हसन जैदी ने कहा कि आरोपित को झूठे तरीके से फंसाया गया है। आरोपित पिछले 12 मार्च से हिरासत में है।

नई दिल्ली।। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली हिंसा के दौरान कर्दमपुरी पुलिया इलाके में एक व्यक्ति की मौत के आरोपित अनवर हुसैन को जमानत दे दी है। एडिशनल सेशंस जज अमिताभ रावत ने कहा कि जिस वीडियो फुटेज के जरिये दिल्ली पुलिस द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, वो घटना वाले दिन की नहीं है।

सुनवाई के दौरान आरोपित की ओर से वकील एस हसन जैदी ने कहा कि आरोपित को झूठे तरीके से फंसाया गया है। आरोपित पिछले 12 मार्च से हिरासत में है। एफआईआर में आरोपित का नाम नहीं है और उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं किया गया है। उसके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें उसे जमानत मिल चुकी है। जैदी ने कहा कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और वह जमानत की सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है।

आरोपित की जमानत का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से वकील राजीव कृष्ण शर्मा ने कहा कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में कम से कम 53 लोगों की जान गई थी और सरकारी और निजी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा था। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध में कुछ लोगों के समूह विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

वे सभी कर्दमपुरी पुलिया के पास हथियारों, लाठी, डंडों और पेट्रोल से लैस थे। इन समूहों के बीच जमकर लड़ाई हुई। उसी दिन पुलिस को जीटीबी अस्पताल से एक कॉल आई कि एक व्यक्ति घायल अवस्था में लाया गया है। ज्योति नगर थाने के जांच अधिकारी ने पाया कि मोहम्मद फुरकान को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था।

फुरकान के भाई मोहम्मद इमरान ने कहा कि जब वह 24 फरवरी की शाम को पांच बजकर बीस मिनट पर कर्दमपुरी पुलिस स्कूटी से जा रहा था तो वहां लोगों की भीड़ खड़ी थी। वहीं उनका भाई फुरकान भी था। इमरान ने फुरकान को बुलाया। जैसे ही फुरकान पीछे मुड़ा वह गिर पड़ा। इमरान ने देखा कि फुरकान के बायें पैर से खून बह रहा था। कुछ लोग फुरकान को जीटीबी अस्पताल लेकर गए । इमरान भी अस्पताल गया, जहां डॉक्टरों ने फुरकान को मृत घोषित कर दिया। शर्मा ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक फुरकान को दो गोलियां लगी थीं।

इस मामले के चश्मदीद गवाहों के मुताबिक 24 फरवरी की सुबह से ही दंगा शुरू हो गया था। पुलिसकर्मियों के बयानों के मुताबिक इमरान भी दंगाइयों की भीड़ में शामिल था। उसे सीसीटीवी फुटेज में देखा गया। जांच के दौरान 12 मार्च को एक गुप्त सूचना के आधार पर अनवर हुसैन को गिरफ्तार किया गया। अनवर ने अपना गुनाह कबूल किया। शर्मा ने कहा कि अनवर घटनास्थल पर मौजूद था और दंगाइयों की भीड़ में शामिल था। उन्होंने कहा कि आरोपित ने पहचान परेड कराने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने 23 फरवरी का वीडियो दिखाया, जिसमें आरोपित को कर्दमपुरी पुलिया पर देखा गया है। उस फुटेज में घटना से संबंधित किसी वाकये की पुष्टि नहीं होती है। फुटेज 23 फरवरी का दिखाया जा रहा है जबकि घटना 24 फरवरी की है। ऐसे में ये वीडियो पुख्ता सबूत नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित इतने दिनों से जेल में है और घटना की परिस्थितियों के मुताबिक उसे जमानत पर रिहा किया जाता है। कोर्ट ने अनवर को 40 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया।

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