बड़ी खबर : नक्सलियों ने कमांडो को किया रिहा, सीआरपीएफ कैंप पहुंचे राकेश्वर सिंह

गुरुवार को सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय मध्यस्ता टीम के सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी,गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया और सात पत्रकारों की टीम समेत दर्जनों ग्रामीणों की मौजूदगी में नक्सलियों ने कोबरा कमांडो को रिहा किया।

रायपुर। छह दिन बाद गुरुवार को नेक खबर मिली है। शनिवार को तर्रेम क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान बंधक बनाए गए कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने रिहा कर दिया है। नक्सलियों ने उन्हें करीब चार बजे मुक्त कर दिया। राकेश्वर सिंह अपने सीआरपीएफ कैंप पहुंच गए हैं जहां उनके साथियों ने उनका स्वागत किया। रामेश्वर सिंह की रिहाई के बाद जम्मू में उनके घर पर जश्न का माहौल है। उनकी पत्नी मीनू ने कहा कि ये उनके लिए जिंदगी का सबसे अहम दिन है।

जानकारी के मुताबिक़ इससे पहले कोबरा कमांडो को वापस लेने के लिए बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी गई थीं लेकिन नक्सलियों ने उन्हें लौटा दिया था। बुधवार को भी सोनी सोरी कुछ स्थानीय पत्रकारों के साथ जंगल गईं थी। इस दौरान उनकी नक्सली नेता से मुलाकात भी हुई, लेकिन नक्सलियों ने राकेश्वर सिंह मनहास को रिहा करने से इंकार दिया था। इससे पहले मंगलवार को नक्सली प्रवक्ता ने एक प्रेस नोट जारी कर सरकार से वार्ता के लिए मधयस्थ नामित करने की मांग की थी।

ख़बरों के मुताबिक़ गुरुवार को सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय मध्यस्ता टीम के सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी,गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया और सात पत्रकारों की टीम समेत दर्जनों ग्रामीणों की मौजूदगी में नक्सलियों ने कोबरा कमांडो को रिहा किया। सरकार ने कोबरा कमांडो की रिहाई के बदले नक्सलियों की मांग पूरी की है या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई पुख्ता सुचना नहीं यही।

कोबरा कमांडो की रिहाई की खबर मिलते ही जम्मू में कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह के घर और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। इस मौके पर राकेश्वर सिंह की पत्नी मीनू ने कहा कि उन्हें शुरू से ही पूरी उम्मीद थी कि उनके पति सकुशल वापस लौटेंगे। यह मेरी जिंदगी का सबसे खुशनुमा दिन है।

गौरतलब है कि गत शनिवार को बीजापुर के तर्रेम क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह लापता हो गए थे। बाद में पता चला कि राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने बंधक बना लिया था।इस मुठभेड़ में 23 जवान शहीद हो गए थे, जबकि दो दर्जन से ज्यादा जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।

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