दिल्ली में LG को और पावरफुल बनाने वाले बिल को केंद्र की मंजूरी, भड़के सिसोदिया, कहा …

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली के उपराज्यपाल को और अधिक पावरफुल बनाने वाले बिल वाले मोदी सरकार के गवर्नमेंट ऑफ़ एनसीटी दिल्ली ऐक्ट में संशोधन को मंजूरी दी है। इस ऐक्ट में कुछ संशोधन कर दिल्ली की निर्वाचित सरकार को तय समय में ही एलजी के पास विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव भेजने का प्रावधान भी है।

जानकारी के मुताबिक़ इस एक्ट में उन विषयों का भी उल्लेख है, जो विधानसभा के दायरे से बाहर आते हैं। यह बिल इसी सत्र में पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि ये संशोधन गवर्नेंस को बेहतर करने के साथ ही दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच टकराव कम करने के लिए किए जा रहे हैं। एक्ट में संशोधन के अनुसार उपराज्यपाल के पास विधायी प्रस्ताव कम से कम 15 दिनऔर प्रशासनिक प्रस्ताव 07 दिन पहले पहुंचाने होंगे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की केंद्र सरकार से आये दिन खटपट होती रहती है। माना जा रहा है कि केंद्र द्वारा एलजी को और ज्यादा अधिकार देने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की टेंशन में इजाफा ही होगा।

दिल्ली के उपमु्ख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि इस संशोधन के जरिये दिल्ली में चुनी हुई सरकार के अधिकार छीनकर उपराज्यपाल को देने का काम किया गया है। इससे दिल्ली सरकार के पास फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ये फैसला लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ गोपनीय तरीके से किया गया।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2019 के एक अहम फैसले में स्थिति स्पष्ट की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक़ दिल्ली की चुनी सरकार तीन मुद्दों को छोड़कर बाकी सभी मसलों पर निर्णय ले सकती है। उपराज्यपाल को सिर्फ सुचना भेजी जाएगी।

सिसोदिया ने कहा कि तीन चुनाव हार चुकी भाजपा पिछले दरवाजे से दिल्ली में शासन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव खूफिया तरीके से हुए हैं। सिसोदिया ने कहा कि इस केंद्र सरकार के इस अलोकतांत्रिक कदम का हम पूरजोर विरोध करेंगे।

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