‘घर घर राशन योजना’ पर रोक लगाने के लिए केंद्र के पास नहीं है कोई ठोस वजह- Manish Sisodia

इससे पहले 19 मार्च को भी केंद्र सरकार ने दिल्ली में राशन की 'डोर स्टेप डिलीवरी' पर रोक लगा दी थी। उस वक्त 25 मार्च से यह योजना शुरू होने वाली थी।

नई दिल्ली।। केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच की उलझने कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर दोनों सरकारें ‘घर घर राशन’ योजना को लेकर आमने सामने हैं। दिल्ली सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार ने उनकी ‘घर घर राशन’ योजना को रोकने संबंधी जो तर्क दिए हैं, वे बेहद कमजोर हैं। केंद्र के पास इस योजना को लागू न करने के विषय में कोई भी ठोस वजह नहीं है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मीडिया के सामने आए और केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर आरोप लगाए। सिसोदिया ने कहा कि ‘केंद्र सरकार ने ‘घर घर राशन’ योजना पर रोक लगाने के कारणों की एक चिट्ठी हमें दी है। इस चिट्ठी में एक भी ठोस कारण नहीं है, जिसकी वजह से हमारी ये योजना रोकी जा रही है।”

सिसोदिया का आरोप है कि गरीबों के घर राशन न पहुंचाने के बचकाने बहाने पेश किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कैसे पता चलेगा कि पता ठीक है? पतली गलियों में राशन कैसे जायेगा? तीसरे माले में राशन कैसे पहुंचेगा? राशन वाली गाड़ी खराब हो गई या फिर ट्रैफिक में फंस गई तो?’ दिल्ली सरकार का कहना है कि राशन बांटने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। यदि इसपर केंद्र सरकार को किसी भी तरह की कोई आपत्ति हो तो हम इसको भी मान रहे हैं। पहले भी हमने बदलाव किए हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार की ‘घर घर राशन’ योजना पर केंद्र सरकार की तरफ से बीते माह में रोक लगा दी गई थी। केंद्र सरकार का कहना था कि दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए मंजूरी नहीं ली थी, जिसके चलते केंद्र ने इस पर फिर से रोक लगा दी है।

दिल्ली सरकार ने राजधानी के 72 लाख राशन कार्डधारकों के घर तक राशन पहुंचाने की योजना बनाई थी। पहले 12 अप्रैल से इस योजना का ट्रायल शुरू होने वाला था, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामले और फिर लॉकडाउन के कारण इसे रोक दिया गया था।

इससे पहले 19 मार्च को भी केंद्र सरकार ने दिल्ली में राशन की ‘डोर स्टेप डिलीवरी’ पर रोक लगा दी थी। उस वक्त 25 मार्च से यह योजना शुरू होने वाली थी। केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति सचिव को चिट्ठी लिखकर कहा था कि इस योजना को शुरू न करें।

इस चिट्ठी में “मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना” नाम पर आपत्ति थी । केंद्र के इस ऐतराज के बाद योजना का नाम हटा दिया था, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने राशन योजना को बिना नाम शुरू करने का निर्णय लिया था।

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