डॉ. विद्या विंदु सिंह को मिला लक्ष्मण प्रसाद मित्र स्मृति अवधी सम्मान

राकेश पांडेय, अनीश देहाती, संतलाल, रश्मिशील और कुमार तरल अवध ज्योति रजत सम्मान से नवाजे गए

लखनऊ। विगत चार वर्षों से प्रख्यात अवधी साहित्यकार स्व. लक्ष्मण प्रसाद मित्र की स्मृति में दिया जाने वाला मित्र स्मृति अवधि सम्मान-2021 अवधी आराधिका डॉ. विद्या विंदु सिंह को प्रदान किया गया। इसके पूर्व यह सम्मान प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित, विक्रममणि त्रिपाठी-नेपाल और जगदीश पीयूष को प्रदान किया जा चुका है। सम्मान के अंतर्गत पांच हजार रुपये की धनराशि, मित्र स्मृति सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र आदि प्रदान किया जाता है।

मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित समारोह में मित्र रचनावली खंड तीन और चार क्रमशः वाटिका व विविधा का लोकार्पण किया गया। मित्र रचनावली के दो खंड पहले ही प्रकाशित हुए हैं। मित्र जी का समग्र साहित्य चार खंडों में प्रकाशित हुआ है, जिसका संपादन डॉ राम बहादुर मिश्र ने किया है। इस अवसर पर अन्य तीन रचनाकारों डाॅ. रमेश मंगल बाजपेयी, विष्णु कुमार शर्मा व अनिल त्रिपाठी की सद्यः प्रकाशित पुस्तकों का भी लोकार्पण संपन्न हुआ। सम्मान के क्रम में डॉ. राकेश पांडेय, डाॅ. संतलाल, रश्मिशील शुक्ला और हौसिला प्रसाद त्रिपाठी ‘कुमार तरल’ को अवध ज्योति रजत सम्मान से सम्मानित किया गया।

लोकार्पित कृति मित्र रचनावली के संदर्भ में जानकारी देते हुए संपादक डा. राम बहादुर मिश्र ने बताया कि मित्र जी के समग्र साहित्य के संपादन का कार्य आज से तीन वर्ष पहले प्रारंभ हुआ जो अब संपन्न हुआ है। मित्र जी ने अवधी गद्य और पद्य दोनों विधाओं में महत्वपूर्ण सर्जना की है।

मुख्य अतिथि प्रवासी संसार के संपादक डा. राकेश पांडेय ने मित्र जी के मूल्यवान अवधी साहित्य पर चर्चा करते हुए बताया कि अवधी भाषा-संस्कृति में निहित शाश्वत और मानवीय मूल्यों के कारण कई देशों में इसकी व्याप्ति है जो अवधी डायस्पोरा के नाम से जाना जाता है।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने मित्र जी की अवधी रचनाधर्मिता पर बोलते हुए कहा कि जिस समय मित्र जी रचना कर रहे थे वह प्रायः पद्य प्रधान युग था बावजूद इसके मित्र जी ने अवधी गद्य का भंडार भरा। सुनीता, सुधरि सगाई, प्रमाण पत्र देउ कि तुम जीवित हौ, अनोखे इनाम का अनोखा बंटवारा आदि अवधी एकांकी इसके प्रमाण हैं।

मित्र जी की पुत्री मनोरमा साहू ने उनसे जुड़े संस्मरण सुनाए। डॉ. विनय दास, डाॅ. रमेश मंगल बाजपेयी, देवेंद्र कश्यप ‘निडर’, डा. संतलाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मित्र सेवा संस्थान के अध्यक्ष अजय साहू ने सब के प्रति आभार व्यक्त किया।

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