49 साल पुराना जादुई इतिहास: 9 साल की बच्ची ने गाया था यह एवरग्रीन रोमांटिक-सैड गाना, आज भी हर दिल की है धड़कन
भारतीय सिनेमा और संगीत (Indian Music Industry) के इतिहास में कई ऐसे गाने बने हैं जो दशकों बाद भी पुराने नहीं होते, बल्कि वक्त के साथ उनकी लोकप्रियता और ज्यादा बढ़ती जाती है। लेकिन क्या आप एक ऐसे गाने के बारे में जानते हैं जिसे आज से ठीक 49 साल पहले एक महज़ 9 साल की छोटी सी बच्ची ने रिकॉर्ड किया था? ताज्जुब की बात यह है कि वह कोई बच्चों का बाल-गीत नहीं, बल्कि बेहद गहरे जज्बातों से भरा एक रोमांटिक-सैड सॉन्ग (Romantic-Sad Song) था। आज पांच दशक बीत जाने के बाद भी यह गाना युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की प्लेलिस्ट में टॉप पर रहता है। यूट्यूब से लेकर इंस्टाग्राम रील्स तक इस कालजयी गाने के अब तक सैंकड़ों रीमिक्स, कवर और अनप्लग्ड वर्जन (Music Cover Versions) आ चुके हैं, लेकिन ओरिजिनल गाने का जादू आज भी बेमिसाल है।
महज़ 9 साल की उम्र में लता मंगेशकर की हमशक्ल आवाज़: सुष्मा श्रेष्ठ (पूर्णिमा) का वो चमत्कार
हम बात कर रहे हैं साल 1977 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' के सुपरहिट गाने "क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा" की। इस गाने को मोहम्मद रफी साहब के साथ जिस नन्हीं और सुरीली आवाज़ ने गाया था, वह थीं 9 साल की बाल कलाकार सुष्मा श्रेष्ठ (जिन्हें बाद में इंडस्ट्री में 'पूर्णिमा' के नाम से जाना गया)। संगीत निर्देशक आर. डी. बर्मन (पंचम दा) ने जब इस गाने के लिए सुष्मा की आवाज़ को चुना, तो कई लोग हैरान थे कि इतनी छोटी बच्ची इतने गंभीर और दर्द भरे गाने के साथ न्याय कैसे कर पाएगी। लेकिन जब गाना रिकॉर्ड हुआ, तो सुष्मा की परिपक्व गायकी ने हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
रफी साहब की गायकी और नन्हीं सुष्मा की जुगलबंदी ने बनाया इसे अमर
गीत के पीछे का संगीत इतिहास: गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे और आर. डी. बर्मन के संगीत से सजे इस गाने ने उस दौर में सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस गाने के लिए मोहम्मद रफी साहब को नेशनल अवार्ड और फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया था, वहीं 9 साल की सुष्मा श्रेष्ठ को भी फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के नामांकन से सम्मानित किया गया था। गाने में जो मासूमियत और दर्द सुष्मा ने पिरोया था, उसने इसे हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना दिया।
सोशल मीडिया पर रीमिक्स और रील्स का दौर; आ चुके हैं सैंकड़ों मॉडर्न वर्जन
आज के डिजिटल और एआई (AI) युग में भी इस गाने का क्रेज रत्ती भर कम नहीं हुआ है। आतिफ असलम से लेकर अरिजीत सिंह और सोनू निगम जैसे देश के दिग्गज सिंगर्स ने अलग-अलग मौकों पर और लाइव कंसर्ट्स में इस गाने के अपने वर्जन पेश किए हैं। इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) और यूट्यूब पर आज की युवा जनरेशन इस गाने के लो-फाइ (Lo-Fi) और स्लोएड-रिवर्ब वर्जन बनाकर लगातार शेयर करती है। ब्रेकअप या दिल टूटने के बाद आज भी युवाओं के लिए यह गाना पहली पसंद बना हुआ है, जो दिखाता है कि सच्चे संगीत की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।
पूर्णिमा (सुष्मा श्रेष्ठ) का बॉलीवुड सफर: 90 के दशक में भी मचाया तहलका
9 साल की उम्र में "क्या हुआ तेरा वादा" जैसे गंभीर गाने से शुरुआत करने वाली सुष्मा श्रेष्ठ ने आगे चलकर 90 के दशक में 'पूर्णिमा' नाम से बॉलीवुड में वापसी की। उन्होंने गोविंदा और करिश्मा कपूर की फिल्मों के कई सुपरहिट और चुलबुले गाने गाए, जिनमें "चने के खेत में", "सोना कितना सोना है" और "सरकाई लो खटिया" जैसे ब्लॉकबस्टर ट्रैक शामिल हैं। लेकिन संगीत के पारखी आज भी उन्हें उसी 9 साल की खुद्दार बच्ची के रूप में याद करते हैं, जिसने अपनी आवाज़ से भारतीय संगीत जगत को एक कभी न भूलने वाला रोमांटिक और दर्द भरा तोहफा दिया था।