शाहरुख खान के नाना ने लाल किले पर पहली बार फहराया था तिरंगा! जानें आजादी की जंग से जुड़ा यह अनसुना किस्सा
बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान के परिवार का इतिहास सिर्फ सिनेमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई से भी उनका बहुत गहरा और गौरवशाली नाता रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था, तब दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीक 'यूनियन जैक' को नीचे उतारकर आजाद भारत का तिरंगा फहराने वाले जांबाज स्वतंत्रता सेनानियों में शाहरुख खान के सगे नाना भी शामिल थे। देश की आजादी और सुभाष चंद्र बोस की 'आजाद हिंद फौज' (INA) से जुड़ा यह ऐतिहासिक किस्सा आज भी लोगों को गर्व से भर देता है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबी थे शाहरुख के नाना शाहरुख खान के नाना का नाम कर्नल इफ्तिखार अहमद था। वह ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक बड़े अधिकारी थे, लेकिन जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश को आजाद कराने के लिए 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया, तो कर्नल इफ्तिखार अहमद अपनी नौकरी छोड़कर नेताजी के साथ आ मिले। नेताजी उनकी बहादुरी और रणनीति के इस कदर कायल थे कि उन्होंने कर्नल इफ्तिखार को आजाद हिंद फौज का मुख्य सैन्य रणनीतिकार और अपनी पर्सनल आर्मर कॉर्प्स का कमांडर नियुक्त कर दिया था।
लाल किले से यूनियन जैक उतारने का वो ऐतिहासिक पल 14-15 अगस्त 1947 की उस ऐतिहासिक रात जब पूरा देश जश्न में डूबा था, तब कर्नल इफ्तिखार अहमद को एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्हें लाल किले के प्राचीर से ब्रिटिश हुकूमत के झंडे 'यूनियन जैक' को सम्मानपूर्वक नीचे उतारने और वहां शान से भारत के तिरंगे झंडे को फहराने वाली टीम का नेतृत्व करने का गौरव प्राप्त हुआ। शाहरुख खान ने खुद कई इंटरव्यूज में गर्व से इस बात का जिक्र किया है कि उनके नाना ने अपने हाथों से उस गुलामी के प्रतीक को हटाया था।
पिता भी थे स्वतंत्रता सेनानी, जेल में काटी थी रातें सिर्फ ननिहाल ही नहीं, बल्कि शाहरुख खान का पैतृक परिवार भी देश सेवा में पूरी तरह समर्पित था। उनके पिता मीर ताज मोहम्मद खान भी एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे। वह सीमांत गांधी के नाम से मशहूर खान अब्दुल गफ्फार खान के संगठन 'खुदाई खिदमतगार' से जुड़े हुए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शाहरुख के पिता को बेहद कम उम्र में ही ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। शाहरुख खान हमेशा कहते हैं कि उन्हें विरासत में जो अनुशासन और देशभक्ति मिली है, वह उनके पुरखों की ही देन है।
पेशावर से दिल्ली और फिर बॉलीवुड का किंग बनने का सफर शाहरुख खान के पिता का जन्म अविभाजित भारत के पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन विभाजन के समय उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया और दिल्ली आ गए। दिल्ली में ही शाहरुख खान का बचपन बीता और बाद में वह मायानगरी मुंबई चले गए। सोशल मीडिया पर अक्सर शाहरुख खान के पारिवारिक इतिहास और उनके नाना की इस बहादुरी के किस्से वायरल होते रहते हैं, जो यह साबित करते हैं कि बॉलीवुड के बादशाह के खून में ही देशप्रेम और संघर्ष की एक लंबी दास्तान दौड़ रही है।