सपा के पूर्व मंत्री व ‘गांजर के गांधी’ के नाम से मशहूर नेता का हुआ निधन, पार्टी में दौड़ी शोक की लहर

छात्र राजनीति के दौर में सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन, आपातकाल के विरुद्ध चले आंदोलनों से राजनीति में उतरे अनीस की गिनती उन दिनों उत्तर प्रदेश के युवा नेताओं में हुआ करती थी।

सीतापुर।। गांजर का गांधी नाम से प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व समाजवादी नेता मुख्तार अनीस का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार देर रात निधन हो गया। लखनऊ पीजीआई में इलाज के दौरान उन्होंने अन्तिम सांस ली। पिछले कई वर्षों से अनीस पक्षाघात से पीड़ित थे। उनके निधन पर सीतापुर से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया।

छात्र राजनीति के दौर में सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन, आपातकाल के विरुद्ध चले आंदोलनों से राजनीति में उतरे अनीस की गिनती उन दिनों उत्तर प्रदेश के युवा नेताओं में हुआ करती थी। सीतापुर की बिसवां तहसील से राजनीति की शुरूआत करने वाले मुख्तार अनीस के संघर्षों के ही कारण वे गांजरी क्षेत्र के राजनेता के तौर पर उभरे।

लोग कहते थे ‘गांजर का गांधी’–

समाजवादी विचारधारा के अनीस 1977 में बेहटा विधान सभा क्षेत्र से दिग्गज कांग्रेसी गंगा स्वरूप भटनागर को हराकर पहली बार विधायक बने। बताया जाता है कि उस समय भटनागर को गांजरी इलाके में जनता गांधी के नाम से पुकारा करती थी। 1977 के चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के कोटे से मुख्तार अनीस जनता पार्टी के चुनाव निशान से चुनाव लड़े थे। जीतने के बाद उन्होंने गांजर के विकास का बीड़ा उठाया।

वे बताते हैं कि उस समय इलाके में मात्र 12 किलोमीटर की सड़क हुआ करती थी। अनीस ने गांजर के विकास के लिए कई आंदोलन चलाए। गन्ना किसानों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था व क्षेत्र के विकास के लिए सीतापुर से लखनऊ तक उन्होंने कई पद यात्राएं भी की। जनपद को बहराइच से जोड़ने वाला चहलारी घाट पुल के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया, उन्हीं के संघर्षों का ही परिणाम रहा कि मुलायम सिंह सरकार में उस पुल की स्वीकृति हुई थी। गांजर में इसके अलावा उन्होंने कई पुल-पुलिया,नाले तथा सड़को का जाल बिछाकर कई विकास कार्य कराए, इसलिए लोग उन्हें गांजर का गांधी पुकारे थे।

विधायक से लेकर मंत्री और सांसद तक का राजनीतिक सफर–

मुख्तार ने अपना लंबा राजनीतिक सफर अपने राजनीतिक वजूद के साथ कायम रखा। 1977 में विधायक बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बने रामनरेश यादव के साथ जनता पार्टी सरकार में उपमंत्री पशुपालन रहे। इसके बाद गृह राज्य मंत्री भी बने। मुलायम सिंह यादव सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। 1977, 1980, 89, व 93 में जीतकर वे विधायक बने। अनीस एक चुनाव बिसवां से भी लड़े पर उन्हें वहां से जीत नहीं मिली। अनीस सीतापुर लोकसभा से समाजवादी पार्टी के सिंबल से संसद सदस्य भी चुने गए।

अनीस के निधन से समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी एवं कांग्रेस के नेताओं ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्हें सीतापुर में आज सुपुर्द ए खाक किया जाएगा।जानकारी के अनुसार, उनके पिता की कब्र के निकट ही उन्हें दफनाकर अंतिम विदाई दी जाएगी।

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