गांधी शांति पुरस्कार घोषित, 2020 का बंगबंधु और 2019 का काबूस बिन अल सैद को …

भारत सरकार द्वारा महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष 1995 में गांधी शांति पुरस्कार शुरू किया गया था।

नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने प्रतिष्ठित गांधी शांति पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। वर्ष 2020 के लिए गांधी शांति पुरस्कार बांग्लादेश के राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और वर्ष 2019 का पुरस्कार ओमान के दिवंगत सुल्तान काबूस बिन अल सैद को दिया जाएगा। गांधी शांति पुरस्कार व्यक्तियों और संस्थानों को अहिंसा और गांधीवादी माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन में उनके योगदान के लिए दिया जाता है। पुरस्कार में पट्टिका के साथ एक करोड़ रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष 1995 में गांधी शांति पुरस्कार शुरू किया गया था। यह पुरस्कार राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, पंथ से परे सभी व्यक्तियों के लिए है। इस पुरस्कार से संबंधित जूरी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री और भारत के प्रधान न्यायाधीश एवं लोकसभा में नेता विपक्ष इसके पदेन सदस्य होते हैं। इनमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, और सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक शामिल हैं।

इससे पहले यह प्रतिष्ठित पुरस्कार तंजानिया के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जूलियस न्येरे, जर्मनीके संघीय गणराज्य के डॉ. गेरहार्ड फिशर, रामकृष्ण मिशन, बाबा आम्टे (मुरलीधर देवदास आम्टे), दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. नेल्सन मंडेला, बंग्लादेश ग्रामीण बैंक, दक्षिण अफ्रीका के आर्कबिशप डेसमंड टूटू, श्चंडी प्रसाद भट्ट और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को दिया जा चूका है।

हाल के वर्षों, में इस परस्कार से नवाजे जाने वालों में 2015 में विवेकानंद केंद्र, साल 2016 में संयुक्त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन, भारत और सुलभ इंटरनेशनल, 2017 में एकल अभियान ट्रस्ट और साल 2018 में जापान के श्री योही ससाकावा आदि लोगों के नाम शामिल हैं।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती और बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए 26 मार्च को ढाका जाने वाले हैं। मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश में राष्ट्रपिता माना जाता है। वह बांग्‍लादेश के पहले राष्ट्रपति और बाद में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे। 15 अगस्त, 1975 को उनकी हत्या कर दी गई। वर्तमान में उनकी बेटी बेगम शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं।

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