हर कोई क्यों छोड़ रहा है गेहूं? एक्सपर्ट ने बताया किसे खानी चाहिए रोटी और किसे नहीं
आजकल स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच 'गेहूं मुक्त' (Wheat-free) डाइट एक बड़ा ट्रेंड बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर जिम तक, हर कोई गेहूं की रोटी से दूरी बनाता दिख रहा है। लेकिन क्या वास्तव में गेहूं छोड़ना सेहत के लिए सही है? पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं पूरी तरह से गलत नहीं है, बल्कि समस्या इसके गलत चयन और पाचन तंत्र से जुड़ी है।
क्यों बढ़ रहा है गेहूं छोड़ने का ट्रेंड?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, गेहूं छोड़ने के पीछे मुख्य कारण इसमें मौजूद 'ग्लूटेन' (Gluten) है। आजकल जिस तरह का प्रोसेस्ड और रिफाइंड गेहूं (मैदा या बारीक पिसा आटा) इस्तेमाल हो रहा है, वह शरीर में सूजन (Inflammation), ब्लोटिंग और पाचन की समस्याएं पैदा कर रहा है। साथ ही, इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन बढ़ने की समस्या ने लोगों को 'ग्लूटेन-फ्री' विकल्पों जैसे बाजरा, ज्वार और रागी की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
किन्हें नहीं खानी चाहिए गेहूं की रोटी?
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सीलिएक रोग (Celiac Disease): जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है, उनके लिए गेहूं जहर समान है।
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पीसीओएस (PCOS) और थायराइड: हार्मोनल असंतुलन से जूझ रही महिलाओं में गेहूं की अधिकता सूजन बढ़ा सकती है।
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ऑटो-इम्यून बीमारियां: शरीर में सूजन की समस्या होने पर गेहूं का सेवन लक्षणों को बिगाड़ सकता है।
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पाचन संबंधी समस्या: जिन्हें हमेशा पेट फूलने, कब्ज या गैस की शिकायत रहती है, वे गेहूं छोड़कर ज्वार या बाजरे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।
किसे खानी चाहिए रोटी?
अगर आपका पाचन तंत्र मजबूत है, आप नियमित शारीरिक गतिविधि (वर्कआउट) करते हैं और आपको ग्लूटेन से कोई एलर्जी नहीं है, तो गेहूं की रोटी आपकी ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है। विशेषज्ञों की सलाह है कि गेहूं के साथ चोकर (Fiber) को शामिल करें या इसमें अन्य मोटे अनाजों का आटा मिलाकर 'मल्टीग्रेन' रोटी बनाएं। यह न केवल अधिक पौष्टिक होगी, बल्कि पाचन में भी आसान रहेगी।