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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह नकारात्मकता को जलाकर जीवन में खुशहाली लाने का भी महापर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि बेहद पवित्र और शक्तिशाली मानी जाती है। यदि आपके बच्चों के जीवन में स्वास्थ्य, नजर दोष या पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी बाधाएं आ रही हैं, तो इस बार होलिका दहन पर नारियल, सरसों और लौंग के विशेष उपाय आपकी हर चिंता दूर कर सकते हैं।

होलिका की अग्नि में छिपा है समस्याओं का समाधान

शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि घर से दरिद्रता, बाधाओं और मानसिक दुखों को दूर करने वाली मानी गई है। लोग अपनी श्रद्धा और समस्याओं के अनुसार अग्नि में विभिन्न वस्तुएं अर्पित करते हैं। विशेष रूप से बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए सूखा नारियल, चंदन, काले तिल, पीली सरसों, लौंग, कपूर और हल्दी का अर्पण अत्यंत फलदायी बताया गया है।

बीमारी और बुरी नजर के लिए 'नारियल' का अचूक टोटका

यदि आपका बच्चा अक्सर बीमार रहता है या उसे बार-बार किसी की बुरी नजर लग जाती है, तो होलिका दहन के दिन यह उपाय जरूर करें। एक सूखा नारियल लें और उसे बच्चे के सिर के ऊपर से सात बार (घड़ी की दिशा में) घुमाएं। इसके बाद इस नारियल को जलती हुई होलिका में अर्पित कर दें। माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चे पर छाई काली छाया दूर होती है और उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आता है।

संतान प्राप्ति और सुखद भविष्य के लिए हल्दी का प्रयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें होलिका दहन के समय अग्नि में हल्दी का एक साबुत टुकड़ा (गांठ) अर्पित करना चाहिए। इसके बाद पति-पत्नी को साथ मिलकर होलिका की सात परिक्रमा करनी चाहिए। यह उपाय संतान प्राप्ति की बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है।

करियर और आर्थिक तंगी दूर करने का सरल उपाय

अगर आपका बच्चा बड़ा हो गया है और उसे करियर या आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, तो एक सूखा नारियल लें। उसमें थोड़ा सा चीनी और चावल भर दें। होलिका दहन के दौरान माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए इसे अग्नि में अर्पित करें। मान्यता है कि इससे धन की देवी प्रसन्न होती हैं और आर्थिक मार्ग में आने वाली सभी रुकावटें समाप्त हो जाती हैं।

विशेष मंत्र से मिलेगा दोगुना फल

होलिका दहन में कोई भी सामग्री अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करना विशेष रूप से कल्याणकारी होता है:

'अहकूट भयत्रस्तै: कृत त्वं होली बालिशै: अत्स्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम'

यह मंत्र न केवल नकारात्मकता को नष्ट करता है, बल्कि ऐश्वर्य और विभूति प्रदान करने वाला भी माना गया है।