क्या आप भी डाक-पार्सल वाले लिफाफे के 'बीच' में लिखते हैं पता? तो ठहरिए, अटकी रह सकती है आपकी जरूरी चिट्ठी
अगर आप भी किसी को चिट्ठी, डाक या पार्सल भेजते समय लिफाफे के ठीक बीचों-बीच पता लिखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि लिफाफे के सेंटर में नाम और पता लिखना सबसे सही तरीका है, लेकिन डाक विभाग के नियमों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह गलत हो सकता है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही या गलत आदत की वजह से आपकी जरूरी चिट्ठी या पार्सल रास्ते में अटक सकता है और समय पर अपने सही पते पर नहीं पहुंच पाएगा।
क्यों लिफाफे के बीच में पता लिखना है गलत?
आज के दौर में डाक विभाग और कूरियर कंपनियां पत्रों को छांटने के लिए पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और ऑटोमैटिक सॉर्टिंग मशीनों का इस्तेमाल करती हैं। ये हाई-टेक मशीनें लिफाफे को स्कैन करके सेकंडों में उसका गंतव्य तय करती हैं। जब आप लिफाफे के ठीक बीच में पता लिख देते हैं, तो मशीनरी स्कैनिंग के दौरान भ्रमित हो जाती है या कई बार बारकोड और स्टाम्प लगाने के लिए तय जगह पर बाधा उत्पन्न होती है। ऐसे में पत्र को छांटने में परेशानी आती है और उसे मैन्युअल सॉर्टिंग के लिए भेजना पड़ता है, जिससे डिलीवरी में भारी देरी हो जाती है।
पत्र भेजने का सही और वैज्ञानिक तरीका क्या है?
भारतीय डाक विभाग (India Post) के नियमानुसार, लिफाफे पर पता लिखने का एक निश्चित फॉर्मेट होता है। हमेशा लिफाफे के दाहिने (Right) हाथ की तरफ निचले हिस्से में पाने वाले (Receiver) का पूरा नाम, मकान नंबर, मोहल्ला, शहर का नाम और सही पिन कोड (PIN Code) लिखना चाहिए। इसके अलावा, भेजने वाले (Sender) का पता हमेशा लिफाफे के ऊपरी बाएं (Left) कोने में या पीछे की तरफ लिखा जाना चाहिए। सही जगह पर पिन कोड और पता लिखने से ऑटोमैटिक मशीनें तुरंत डाक को पहचान लेती हैं और वह बिना किसी रुकावट के तेजी से आगे बढ़ जाती है।
पिन कोड लिखना क्यों है सबसे जरूरी?
डाक अधिकारियों के मुताबिक, लिफाफे पर सही और स्पष्ट अक्षरों में पिन कोड लिखना सबसे अहम होता है। कई लोग पिन कोड आखिरी पंक्ति में जल्दबाजी में लिख देते हैं या हैंडराइटिंग इतनी खराब होती है कि मशीन उसे पढ़ नहीं पाती। हमेशा साफ-सुथरे अक्षरों में और तयशुदा स्थान पर ही पता दर्ज करें, ताकि आपकी डाक बिना किसी परेशानी के सीधे उस व्यक्ति तक पहुंच सके जिसके लिए आपने उसे भेजा है।