जिम्मेदारियों को दी मात: 11 साल की नौकरी और 2 बच्चों की मां ने पूरे किए अपने सपने, समाज के लिए बनीं मिसाल, अब बनीं SDM
पारिवारिक जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच नहीं रुकने दी पढ़ाई
सफलता की यह अद्भुत और प्रेरक कहानी साबित करती है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो उम्र और परिस्थितियां कभी आड़े नहीं आतीं। पिछले 11 साल से एक सरकारी विभाग में अपनी सेवाएं दे रहीं और दो छोटे बच्चों की मां ने प्रांतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर सीधे एसडीएम (SDM) का पद हासिल किया है। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए और नौकरी के साथ पढ़ाई के लिए वक्त निकालना उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अपनी ताकत बना लिया।
बिना कोचिंग और टाइम मैनेजमेंट से हासिल किया बड़ा मुकाम
आमतौर पर माना जाता है कि प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए दिल्ली या बड़े शहरों में रहकर दिन-रात कोचिंग करनी पड़ती है। लेकिन इस जुझारू महिला ने घर और दफ्तर के बीच ही अपना स्टडी रूम तैयार किया। बच्चों के सो जाने के बाद रात के सन्नाटे में और सुबह दफ्तर जाने से पहले के कीमती घंटों का उन्होंने बेहतरीन टाइम मैनेजमेंट किया। बिना किसी महंगी कोचिंग के, सिर्फ सेल्फ स्टडी, ऑनलाइन सोर्सेज और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने परीक्षा के हर चरण (प्रारंभिक, मुख्य और इंटरव्यू) को पहले ही गंभीर प्रयासों में क्रैक कर दिया।
महिला सशक्तिकरण और नए भारत की बुलंद तस्वीर
एसडीएम के पद पर चयनित होने के बाद उनके पूरे परिवार और समाज में जश्न का माहौल है। अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उन्होंने अपने पति और परिवार के अटूट सहयोग को दिया है, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया। उनकी यह 'सक्सेस स्टोरी' देश की उन लाखों कामकाजी महिलाओं और माताओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है जो पारिवारिक दायित्वों के बीच अपने सपनों को दबा देती हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि एक मां चाहे तो वह परिवार को संभालने के साथ-साथ शासन-प्रशासन के शीर्ष पदों पर भी बैठकर समाज को नई दिशा दे सकती है।