RJD का टिकट लेकर आए पति की आरती उतारना जिप अध्यक्ष को पड़ा भारी
बिहार की राजनीतिक गलियारों से इस समय एक बेहद हैरान करने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के खिलाफ एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए जिला परिषद (जिप) अध्यक्ष संगीता देवी को अपनी पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पूरा मामला तब गरमाया जब संगीता देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, जिसमें वह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का सिंबल या टिकट लेकर आए अपने पति की बकायदा पारंपरिक तरीके से आरती उतारती हुई नजर आ रही थीं। बिहार की राजनीति में वैसे तो गठबंधन और राजनीतिक पालाबदल की घटनाएं आम बात मानी जाती हैं, लेकिन एक ही घर के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष का ऐसा खुला मेल और जश्न का माहौल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को नागवार गुजरा। जेडीयू संगठन ने इसे पार्टी के अनुशासन, नीतियों और वैचारिक निष्ठा के खिलाफ एक गंभीर उल्लंघन मानते हुए बिना किसी देरी के सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से ही राज्यभर के राजनीतिक दलों और प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, और हर कोई इस दिलचस्प मामले की परतें टटोलने में लगा हुआ है।
क्या है पूरा मामला: कैसे आरजेडी का टिकट मिलने की खुशी में उड़ी राजनीतिक मर्यादा की धज्जियां
इस पूरे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब आगामी चुनावों या राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर संगीता देवी के पति को विपक्षी दल आरजेडी की तरफ से आधिकारिक टिकट या समर्थन मिलने की बात सामने आई। पति को टिकट मिलने की इस बड़ी सफलता से उत्साहित होकर घर में जश्न का माहौल बन गया, और जिला परिषद अध्यक्ष के पद पर रहते हुए संगीता देवी ने अपने पति की आरती उतारकर उनका स्वागत किया और इस पल का वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक मंचों और राजनीतिक दलों के व्हाट्सएप ग्रुप्स तक पहुंचा, वैसे ही जेडीयू के स्थानीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के बीच हड़कंप मच गया। एक तरफ जहां संगीता देवी जनता दल यूनाइटेड समर्थित पृष्ठभूमि से जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज थीं, वहीं उनके पति का विपक्षी दल आरजेडी के खेमे में जाना और घर में इस प्रकार का जश्न मनाया जाना जेडीयू के लिए असहनीय हो गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पार्टियों के भीतर अंदरूनी कलह और वैचारिक विरोधाभास को खुलकर सामने ले आती हैं, जिसके चलते हाईकमान को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा।
जेडीयू का कड़ा एक्शन: अनुशासनहीनता के खिलाफ पार्टी ने उठाया जीरो टॉलरेंस का कदम
जनता दल यूनाइटेड अपनी अनुशासनप्रियता और संगठनात्मक एकजुटता के लिए जानी जाती है, और पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस तरह की लापरवाही को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाता है। जैसे ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में यह मामला आया, तुरंत आंतरिक जांच बिठाई गई और वीडियो की सत्यता की पुष्टि होने के बाद संगीता देवी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त करने का कड़ा फैसला सुना दिया गया। जेडीयू के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी के पद पर रहते हुए विरोधी दल के पक्ष में इस तरह का खुला प्रचार या समर्थन करना सीधा-सीधा पार्टी विरोधी गतिविधि की श्रेणी में आता है। किसी भी राजनीतिक दल में रहकर उसके सिद्धांतों से समझौता करना और विपक्षी खेमे के साथ इस तरह की नजदीकी दिखाना संगठन की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, यही वजह है कि पार्टी ने बिना किसी दबाव के यह सख्त संदेश देने का प्रयास किया है कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर माफ नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद से जिला स्तर पर उन तमाम नेताओं और पदाधिकारियों को भी एक कड़ा संदेश मिल गया है जो अक्सर दोहरी राजनीति खेलने की कोशिश करते हैं।
बिहार की सियासत पर पड़ने वाले दूरगामी असर और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण, पारिवारिक निष्ठाएं और दलबदल के खेल हमेशा से चुनावी नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाते आए हैं। संगीता देवी के जेडीयू से निष्कासित होने के बाद अब स्थानीय निकाय की राजनीति और आगामी चुनावों के समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां आरजेडी खेमा इस घटना के बाद उत्साहित नजर आ रहा है और इसे अपनी राजनीतिक बढ़त के रूप में देख रहा है, वहीं जेडीयू ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी वैचारिक और संगठनात्मक शुद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि संगीता देवी और उनके पति इस कार्रवाई के बाद अगला कौन सा राजनीतिक कदम उठाते हैं और क्या वे औपचारिक रूप से आरजेडी का दामन थामते हैं या नहीं। बहरहाल, इस एक वीडियो ने बिहार की स्थानीय राजनीति में भूचाल लाकर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के इस दौर में राजनीति में जरा सी भी चूक या अति-उत्साह नेताओं के लिए कितना भारी पड़ सकता है, और जनता इस पूरे घटनाक्रम को बहुत ही नजदीकी से देख रही है।