कौन हैं डॉ. दिव्या ज्योति जो प्रशांत किशोर की पार्टी में हुईं शामिल? पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव को देंगी कड़ी टक्कर
बिहार की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की रणनीतियों की गूंज चारों तरफ सुनाई दे रही है। राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए जन सुराज एक के बाद एक कड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में आगामी बिहार विधान परिषद चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां जानी-मानी शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्या ज्योति ने औपचारिक रूप से जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती की उपस्थिति में उन्होंने जन सुराज की सदस्यता ग्रहण की और पार्टी का चुनाव चिह्न 'स्कूल बैग' थामा। उनके पार्टी में शामिल होने के बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि प्रशांत किशोर उन्हें आगामी विधान परिषद चुनाव के दौरान पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना सकते हैं। इस राजनीतिक हलचल ने राज्य के सियासी तापमान को अचानक काफी बढ़ा दिया है, क्योंकि इस सीट पर पिछले तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार का दबदबा रहा है।
कौन हैं डॉ. दिव्या ज्योति और क्या है उनकी सामाजिक व शैक्षणिक पृष्ठभूमि?
बिहार की राजधानी पटना की मूल निवासी और मुख्य रूप से बाढ़ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली डॉ. दिव्या ज्योति शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह वर्तमान में चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं और इसके साथ ही चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ (CEO) के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। शैक्षणिक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ वह लंबे समय से समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के उत्थान, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षकों के मान-सम्मान से जुड़े मुद्दों पर मुखर होकर काम करती रही हैं। महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने समाज में समानता और न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। महात्मा गांधी और अंबेडकर के सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए ही उन्होंने प्रशांत किशोर की राजनीतिक विचारधारा और कार्यशैली से प्रभावित होकर जन सुराज के साथ जुड़ने का महत्वपूर्ण फैसला किया है।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लंबे समय से तैयारी और नवल किशोर यादव को चुनौती
बिहार विधान परिषद की जिन सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र बेहद हाई-प्रोफाइल माना जाता है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास देखें तो पिछले लगभग तीन दशकों यानी वर्ष 1996 से लगातार भाजपा समर्थित दिग्गज नेता नवल किशोर यादव इस क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं और विधान परिषद में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। डॉ. दिव्या ज्योति काफी लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से जनसंपर्क कर रही थीं और उन्होंने पहले इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर रखा था। अब जबकि उन्होंने जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर उन्हें इसी सीट से चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा के इस सबसे मजबूत और पुराने किले में सीधी सेंध लगाने की तैयारी कर चुके हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पटना, नालंदा और नवादा जिले आते हैं, जहां के शिक्षक मतदाता इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
जन सुराज की रणनीति और विधान परिषद चुनाव का बदलता समीकरण
जन सुराज पार्टी ने पहले ही यह ऐलान कर रखा है कि वह आगामी नवंबर महीने में कार्यकाल पूरा होने वाली बिहार विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी की इस घोषणा के बाद से ही राजनीतिक दलों की नींद उड़ गई है। हाल ही में बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में प्रशांत किशोर की रणनीति ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को चौंकाते हुए बड़ी सफलता हासिल की थी, और अब उसी तर्ज पर एमएलसी चुनावों में भी बड़े उलटफेर की तैयारी की जा रही है। हालांकि, चुनाव की घोषणा से पहले ही जन सुराज पार्टी ने मतदाता सूची (Voter List) की पारदर्शिता और शुचिता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का यह तर्क है कि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनावों की मतदाता सूची पूरी पारदर्शिता के साथ केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में तैयार होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न बचे।
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार और क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों की चर्चा
डॉ. दिव्या ज्योति के जन सुराज में शामिल होने और पटना शिक्षक सीट से संभावित उम्मीदवार बनने की चर्चा के बाद इस क्षेत्र का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय होने के पूरे आसार बन गए हैं। एक तरफ जहां पिछले 30 सालों से इस सीट पर काबिज नवल किशोर यादव अपनी मजबूत पकड़ और अनुभव के आधार पर मैदान में डटे रहने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन और अन्य दलों की तरफ से भी मजबूत चेहरों को उतारने की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। भूमिहार समुदाय से ताल्लुक रखने वाली डॉ. दिव्या ज्योति का ससुराल पटना के अम्हारा क्षेत्र में है, जिससे स्थानीय और सामाजिक समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं। शिक्षक मतदाताओं के बीच उनकी पैठ और युवाओं तथा महिलाओं के बीच उनकी सक्रियता इस मुकाबले को बेहद रोमांचक बना रही है। देखना यह होगा कि क्या प्रशांत किशोर का यह नया दांव भाजपा के इस दशकों पुराने अजेय दुर्ग को ध्वस्त करने में कामयाब हो पाता है या नहीं।