रूसी तेल के बहाने भारत पर 100% टैरिफ का फंदा या ट्रेड डील का जाल? जानिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का असली गेम प्लान

रूसी तेल के बहाने भारत पर 100% टैरिफ का फंदा या ट्रेड डील का जाल? जानिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का असली गेम प्लान

वैश्विक कूटनीति के पटल पर इस समय अमेरिका और भारत के बीच एक बेहद दिलचस्प और पेचीदा शह-मात का खेल चल रहा है। अमेरिकी सीनेट (US Senate) में रूस पर प्रतिबंधों को लेकर एक नया और बेहद आक्रामक द्विदलीय (Bipartisan) बिल पेश किया गया है। इस बिल में रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों— जिसमें भारत और चीन प्रमुख हैं— पर 100% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ (आयात शुल्क) ठोकने का प्रस्ताव है।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां अमेरिका भारत को इस 100% भारी टैक्स की धमकी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बैकचैनल से भारत के साथ एक बड़े 'ट्रेड डील' (Trade Deal) की बातचीत भी बढ़ा रहा है। आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल के बहाने भारत के साथ कौन-सा खेल खेल रहे हैं? आइए अमेरिका के इस पूरे चक्रव्यूह को आसान भाषा में डिकोड करते हैं।

500% से 100% पर आया अमेरिका; क्या यह राहत है?

दरअसल, यह पूरा विवाद पिछले साल अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था जब अमेरिकी सीनेट में 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट' (Sanctioning Russia Act) लाया गया था। उस मूल ड्राफ्ट में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का विनाशकारी टैक्स लगाने का प्रस्ताव था। इस बिल को आगे बढ़ाने में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) की बड़ी भूमिका थी, जिनका हाल ही में निधन हो गया है।

अब ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सीनेटरों के बीच महीनों चली बातचीत के बाद इस बिल को संशोधित (Soften) किया गया है। 500% के उस बेतुके टैक्स के डर को हटाकर अब इसे अधिकतम 100% तक सीमित कर दिया गया है। अमेरिकी सांसदों के मुताबिक, रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों— चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान को टारगेट करने के लिए यह नया बिल तैयार किया गया है, ताकि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक रीढ़ (Energy Revenue) तोड़ी जा सके।

एक तरफ 'डराना' और दूसरी तरफ 'लुभाना': ट्रंप की पुरानी रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप बिजनेस और डिप्लोमेसी दोनों में ही 'आर्ट ऑफ द डील' (Art of the Deal) नीति के लिए जाने जाते हैं। वे पहले दुश्मन या पार्टनर पर भारी दबाव (जैसे 100% टैरिफ की धमकी) बनाते हैं और जब सामने वाला दबाव में आ जाता है, तो वे अपनी शर्तों पर एक नई डील (Trade Deal) ऑफर करते हैं। भारत के संदर्भ में भी ट्रंप यही दोहरा रहे हैं:

  • डिटेरेंस (टैक्स का डर): भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 36% हिस्सा इस समय रूस से बेहद सस्ते दामों पर खरीद रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी यह निर्भरता पूरी तरह खत्म करे या बहुत कम कर दे।

  • ट्रेड डील का गाजर: इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार (Waiver Authority) दिया गया है कि वे 'राष्ट्रीय हित' का हवाला देकर किसी भी देश पर से इस टैक्स को हटा या माफ कर सकते हैं। यहीं पर ट्रंप का असली खेल शुरू होता है। अमेरिका भारत से कह रहा है कि यदि भारत रूसी तेल कम करता है और अमेरिकी डॉलर की बादशाहत (De-dollarization के खिलाफ) को बनाए रखने का वादा करता है, तो अमेरिका भारत को 100% टैरिफ से पूरी छूट दे देगा और बदले में एक शानदार द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Trade Deal) भी करेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz) का संकट और भारत की मजबूरी

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। हाल ही में मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य टकराव के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का समुद्री मार्ग पूरी तरह बाधित हो चुका है। पहले भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल इसी खाड़ी (Gulf) के रास्ते मंगाता था, जो अब ठप पड़ा है। ऐसे में भारत के पास अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बनाए रखने के लिए रूस से रिकॉर्ड तोड़ तेल इम्पोर्ट करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

क्या पास हो पाएगा यह बिल और भारत पर क्या होगा असर?

वाशिंगटन के गलियारों से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, यह बिल अगस्त 2026 से पहले अमेरिकी संसद से पास हो सकता है क्योंकि इसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों का भारी समर्थन हासिल है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से बयान देकर इस बिल को हरी झंडी दी है।

हालांकि, भारतीय राजनयिकों और विदेश मंत्रालय का मानना है कि भारत अमेरिका का एक बेहद रणनीतिक साझेदार (Strategic Partner) है, जिसे चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका कभी नहीं खोना चाहेगा। भारत इस 100% टैरिफ के फंदे से बचने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठेगा, जहां भारत रूस से तेल खरीद को धीरे-धीरे कम करने (Scaling Back) का आश्वासन देकर या अमेरिका से ही अतिरिक्त तेल व गैस की खरीद बढ़ाकर ट्रंप को एक बड़ी व्यापारिक डील का लालच दे सकता है। कुल मिलाकर, यह 100% टैरिफ भारत को झुकाने के लिए ट्रंप का एक बड़ा 'बार्गेनिंग चिप' (Bargaining Chip) है।

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