US Tariff Update: अमेरिका ने भारत-चीन को दी बड़ी राहत! रूस से तेल खरीदने पर अब 500% की जगह लगेगा सिर्फ 100% टैरिफ; जानें सीनेट के नए बिल का सच
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने अपनी रणनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर पेश किए गए "Sanctioning Russia Act of 2026" बिल में भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों को बड़ी राहत दी गई है।
पहले जहां इन देशों पर 500% तक का भारी-भरकम दंडात्मक आयात शुल्क (Tariff) लगाने का बेहद कड़ा प्रस्ताव था, वहीं अब नए संशोधित विधेयक में इसे घटाकर अधिकतम 100% तक सीमित कर दिया गया है।
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अमेरिका के इस कदम को वैश्विक कूटनीति और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मूल रूप से दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटथल द्वारा तैयार किए गए इस बिल में अमेरिकी प्रशासन ने माना कि भारत और चीन जैसी महाशक्तियों पर अचानक 500% का भारी टैरिफ लगाने से वैश्विक बाजार में हाहाकार मच सकता था और वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती थी।
यही वजह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले इस नए बिल में टैरिफ की सीमा को घटाकर अधिकतम 100% करने का व्यावहारिक प्रस्ताव रखा गया है।
इन 5 बड़े खरीदारों पर सीधे रहेगा अमेरिकी प्रतिबंधों का फोकस
अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस नए कानून के तहत उन शीर्ष देशों को निशाना बनाया गया है जो सीधे तौर पर रूस के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं। इन प्रतिबंधित देशों की सूची को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
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रूस से कच्चा तेल (Oil) खरीदने वाले टॉप देश: इस सूची में भारत और चीन के साथ स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का नाम शामिल है।
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रूस से प्राकृतिक गैस (Gas) खरीदने वाले टॉप देश: इसमें चीन, फ्रांस, बेल्जियम, जापान और हंगरी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप को मिली विशेष छूट (Waiver) देने की वीटो पावर
इस नए विधेयक में एक और महत्वपूर्ण पहलू जोड़ा गया है, जो भारत जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मित्र देशों के लिए एक बड़ी राहत है। बिल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह विशेष वीटो पावर होगी कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक बाजार की स्थिरता या द्विपक्षीय हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश को इन प्रतिबंधों और टैरिफ से पूरी तरह या आंशिक रूप से छूट दे सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई देश रूस से अपनी गैस और तेल की निर्भरता को लगातार कम करने के कदम उठा रहा है और उसका कुल आयात रूसी निर्यात के 15% से कम है, तो उसे भी रियायत दी जा सकती है। अब इस बिल को सीनेट में अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा।