Dengue Alert: डेंगू में प्लेटलेट्स कितने गिरने पर बढ़ता है असली खतरा? डॉक्टर ने चेताया— भूलकर भी न करें ये 3 बड़ी गलतियां
बदलते मौसम और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच डेंगू बुखार के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिलता है। डेंगू का नाम सामने आते ही सबसे पहला डर जो लोगों के मन में बैठता है, वो है प्लेटलेट्स (Platelets) का गिरना। अक्सर लोग प्लेटलेट्स काउंट थोड़ा सा कम होते ही बुरी तरह घबरा जाते हैं और अस्पताल की तरफ भागते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिकल साइंस के अनुसार प्लेटलेट्स कितने स्तर तक गिरने पर असल में खतरे की घंटी बजती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों ने इस पर स्थिति साफ करते हुए उन 3 गंभीर गलतियों के बारे में भी बताया है, जो मरीज की स्थिति को सुधारने के बजाय और अधिक बिगाड़ देती हैं।
जानिए किस आंकड़े पर जाकर गंभीर हो जाती है मरीज की स्थिति
एक स्वस्थ इंसान के शरीर में सामान्य प्लेटलेट्स काउंट 1.5 लाख से 4.5 लाख के बीच होता है। डेंगू संक्रमण के दौरान यह काउंट नीचे आना शुरू हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर प्लेटलेट्स काउंट 1 लाख या 80 हजार तक भी आ जाए, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। असली निगरानी तब शुरू होती है जब यह आंकड़ा 50 हजार से नीचे चला जाए। डॉक्टरों के अनुसार, जब तक प्लेटलेट्स काउंट 20 हजार या उससे कम न हो जाए और शरीर से ब्लीडिंग (जैसे मसूड़ों, नाक या यूरीन के रास्ते खून आना) के लक्षण न दिखें, तब तक प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। केवल नंबर गिरने से ज्यादा महत्वपूर्ण मरीज के शरीर के लक्षण होते हैं।
पहली गलती: पैनिक होकर जबरन अस्पताल में बेड ब्लॉक करना
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मामलों में सबसे पहली और आम गलती यह देखी जाती है कि लोग प्लेटलेट्स काउंट 90 हजार या 1 लाख होते ही पैनिक बटन दबा देते हैं। वे डॉक्टरों पर मरीज को अस्पताल में भर्ती करने और तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाने का दबाव बनाने लगते हैं। इस घबराहट के कारण जिन गंभीर मरीजों को सच में आईसीयू या बेड की जरूरत होती है, उन्हें जगह नहीं मिल पाती। जब तक मरीज का लिक्विड इनटेक अच्छा है और वह ओआरएस या पानी अच्छे से पी पा रहा है, तब तक डॉक्टर की सलाह पर घर पर ही उसका इलाज सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।
दूसरी गलती: बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाइयां (Self-Medication) लेना
डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने का एक बड़ा कारण गलत दवाओं का सेवन भी होता है। लोग बुखार कम करने के लिए मेडिकल स्टोर से बिना पूछे कोई भी पेनकिलर या एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं खा लेते हैं। डॉक्टर साफ तौर पर मना करते हैं कि डेंगू में भूलकर भी ऐसी दर्द निवारक दवाएं न लें, क्योंकि ये खून को पतला करती हैं और शरीर के अंदर ब्लीडिंग के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। डेंगू में बुखार और बदन दर्द को नियंत्रित करने के लिए केवल और केवल पैरासिटामोल ही सुरक्षित मानी जाती है, वह भी डॉक्टर द्वारा तय की गई खुराक के अनुसार।
तीसरी गलती: सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना और हाइड्रेशन को नजरअंदाज करना
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में डेंगू होते ही लोग पपीते के पत्ते का रस, बकरी का दूध और कीवी जैसे घरेलू नुस्खों के पीछे पूरी तरह से दीवाने हो जाते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि हालांकि इनमें से कुछ चीजें प्लेटलेट्स को रिकवर करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन लोग सबसे जरूरी चीज यानी 'हाइड्रेशन' को भूल जाते हैं। डेंगू में मौत का मुख्य कारण प्लेटलेट्स का गिरना नहीं, बल्कि शरीर में पानी की गंभीर कमी (डीहाइड्रेशन) होना है। मरीज को लगातार पानी, नारियल पानी, ओआरएस का घोल और सूप जैसी चीजें देते रहना चाहिए ताकि ब्लड प्रेशर सामान्य रहे और शरीर का गाढ़ापन कम हो सके।