1,000 लड़कों पर सिर्फ 787 लड़कियां; भारत के इस हिस्से में सबसे कम बचीं बेटियां, चौंकाने वाले आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की टेंशन
हैदराबाद/नलगोंडा: भारत में जहां एक तरफ बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से लगातार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के एक बड़े हिस्से से आई रिपोर्ट ने सबको स्तब्ध कर दिया है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth - SRB) इस कदर गिर चुका है कि अब यहां प्रति 1,000 लड़कों के जन्म पर केवल 787 लड़कियों का ही जन्म दर्ज किया जा रहा है। इस चौंकाने वाले गैप ने स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रशासनिक महकमे की रातों की नींद उड़ा दी है।
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
हाल ही में जारी हुई सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की ताजा रिपोर्ट में दक्षिण भारत के राज्य तेलंगाना (Telangana) को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य के कुल 33 जिलों में से 14 जिलों में बेटियों का जन्मदर ग्राफ 900 के आंकड़े से भी काफी नीचे चला गया है। लेकिन इस पूरे संकट का सबसे डरावना केंद्र तेलंगाना का नलगोंडा (Nalgonda) जिला बनकर उभरा है। नलगोंडा में जन्म के समय लिंगानुपात घटकर महज 787 तक पहुंच गया है, जो न केवल इस राज्य का सबसे खराब आंकड़ा है, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा रेड अलर्ट है।
एक तरफ महासंकट, तो दूसरी तरफ 'कामारेड्डी' ने पेश की मिसाल
इस गंभीर संकट के बीच तेलंगाना के ही एक अन्य जिले से बेहद सुखद और सकारात्मक खबर भी आई है। जहां नलगोंडा जैसी जगहों पर स्थिति बदतर है, वहीं राज्य का कामारेड्डी (Kamareddy) जिला पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर सामने आया है। कामारेड्डी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है और यहां लड़कों से ज्यादा बेटियों ने जन्म लिया है। आंकड़ों के अनुसार, कामारेड्डी में प्रति 1,000 लड़कों पर 1,060 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया है। इसके अलावा मुलुगु में यह आंकड़ा 991 और सिद्दीपेट में 951 रहा, जो राज्य के औसत आंकड़े से कहीं बेहतर है।
नलगोंडा के अलावा इन जिलों में भी मंडरा रहा है खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के कई अन्य बड़े जिलों में भी हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। नलगोंडा (787) के बाद सबसे खराब स्थिति महबूबाबाद (Mahabubabad) में है जहां यह आंकड़ा 805 है। इसके बाद नागरकुरनूल में 842, वनपर्थी में 848, वारंगल में 849 और रंगारेड्डी में 875 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आज भी बेटों को प्राथमिकता देने की पुरानी रूढ़िवादी मानसिकता और चोरी-छिपे लिंग जांच (Sex Determination) जैसी कुप्रथाएं इस असंतुलन की मुख्य वजह हैं। सरकार अब इन प्रभावित जिलों में पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) कानून को और सख्ती से लागू करने और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सख्त निगरानी करने का प्लान बना रही है।